झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा उनके खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्रवाई पर अंतरिम (Hemant Soren Supreme Court) रोक लगा दी है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में जारी समन की कथित अवज्ञा को लेकर शुरू की गई थी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने रांची के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में ईडी द्वारा दायर आपराधिक शिकायत पर चल रही कार्यवाही को फिलहाल स्थगित करने का आदेश दिया। यह आदेश हेमंत सोरेन की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें उन्होंने झारखंड हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ कार्रवाई रद्द करने से इनकार किया गया था।
सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से कहा गया कि एजेंसी द्वारा सात बार समन भेजे जाने के बावजूद मुख्यमंत्री (Hemant Soren Supreme Court) पेश नहीं हुए। वहीं, सोरेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि वे तीन बार जांच एजेंसी के सामने उपस्थित हुए थे और इसके बावजूद उन्हें गिरफ्तार किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसी की कार्रवाई अनुचित है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को नोटिस जारी करते हुए मामले में जवाब मांगा है। अदालत ने एजेंसी से कहा कि वह लंबित मामलों पर ध्यान केंद्रित करे और प्रभावी परिणाम सुनिश्चित करे। इस टिप्पणी को भी मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह पूरा मामला कथित जमीन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ा है। ईडी ने आरोप लगाया था कि समन जारी होने के बावजूद सोरेन पेश नहीं हुए, जिसके बाद एजेंसी ने विशेष अदालत में आपराधिक शिकायत (Hemant Soren Supreme Court) दर्ज कराई थी। झारखंड हाई कोर्ट ने पहले इस कार्रवाई को रद्द करने से इनकार कर दिया था, जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई पर रोक लग गई है। अब इस मामले में अगली सुनवाई और अदालत के अंतिम निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

