Harish Rana Euthanasia Update AIIMS : सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद बड़ा फैसला, एम्स ने बढ़ाया मेडिकल बोर्ड, हरीश राणा पर नया अपडेट

13 साल से बिस्तर पर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हरीश राणा के मामले में अब एक अहम मोड़ सामने (Harish Rana Euthanasia Update AIIMS) आया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मेडिकल प्रक्रिया को और मजबूत करते हुए बड़ा फैसला लिया है।

मेडिकल बोर्ड का विस्तार, अब 10 विशेषज्ञ देखेंगे मामला

हरीश राणा के केस को देखते हुए मेडिकल बोर्ड के सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 5 से 10 कर दी गई है। इसमें न्यूरोलॉजिस्ट, क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट और साइकेट्रिस्ट शामिल किए गए हैं, ताकि हर पहलू का गहराई से आकलन किया जा सके।

क्या वेंटिलेटर पर हैं हरीश? सामने आई स्थिति

डॉक्टरों के अनुसार, हरीश राणा इस समय वेंटिलेटर पर नहीं हैं। हालांकि, उनकी हालत स्थिर बनी हुई है, लेकिन शरीर के कई अंग पूरी तरह से काम नहीं (Harish Rana Euthanasia Update AIIMS) कर रहे हैं। उन्हें अभी भी जरूरी दवाएं और सपोर्टिव ट्रीटमेंट दिया जा रहा है।

धीरे-धीरे हटाया जा रहा मेडिकल सपोर्ट (Harish Rana Euthanasia Update AIIMS)

एम्स की पेलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती हरीश राणा को दी जा रही कुछ मेडिकल सहायता को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है। उनका न्यूट्रिशनल सपोर्ट भी बंद कर दिया गया है और आगे की प्रक्रिया विशेषज्ञों की निगरानी में की जा रही है।

ऑर्गन डोनेशन पर भी चल रही जांच

हरीश राणा के अंगों की स्थिति को लेकर भी जांच जारी है। डॉक्टरों का कहना है कि ऑर्गन डोनेशन संभव होगा या नहीं, इसका अंतिम फैसला मेडिकल परीक्षण के बाद ही लिया जाएगा, क्योंकि कई अंग पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं।

परिवार की काउंसलिंग पर विशेष ध्यान

इस पूरे मामले में परिवार की मानसिक स्थिति को देखते हुए साइकेट्रिस्ट की एक टीम तैनात (Harish Rana Euthanasia Update AIIMS) की गई है। यह टीम रोजाना हरीश के माता-पिता और भाई से बातचीत कर उन्हें इस कठिन परिस्थिति के लिए मानसिक रूप से तैयार कर रही है।

मानवीय पहल – परिजन को साथ रहने की अनुमति

एम्स प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए परिवार के एक सदस्य को हरीश के साथ रहने (Harish Rana Euthanasia Update AIIMS) की अनुमति दी है। उनकी मां अधिकतर समय उनके पास रहती हैं, जबकि अन्य सदस्य भी समय-समय पर उनसे मिलने पहुंच रहे हैं।

हर फैसला मेडिकल नियमों के तहत

डॉक्टरों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया मेडिकल गाइडलाइंस के अनुसार की जा रही है और हर कदम विशेषज्ञों की सलाह से उठाया जा रहा है।

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