Harish Rana Euthanasia Case India : सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद चर्चा में हरीश राणा का इच्छामृत्यु केस, आखिर क्या है क्वाड्रिप्लेजिया जिसने जिंदगी रोक दी

इच्छामृत्यु को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद हरीश राणा का मामला पूरे देश में चर्चा का विषय (Harish Rana Euthanasia Case India) बन गया है। पिछले 13 वर्षों से वेजिटेटिव स्टेट में जी रहे हरीश की हालत के पीछे एक गंभीर मेडिकल कंडीशन-क्वाड्रिप्लेजिया-मुख्य वजह रही है, जिसने उनके शरीर को लगभग पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया।

बताया जाता है कि साल 2013 में चंडीगढ़ में ऊंचाई से गिरने के बाद उनकी गर्दन और रीढ़ की हड्डी को गंभीर चोट पहुंची थी, जिसके बाद उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।

क्वाड्रिप्लेजिया क्या होता है, क्यों है इतना खतरनाक

क्वाड्रिप्लेजिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति के दोनों हाथ और दोनों पैर काम करना बंद कर देते हैं। यह मुख्य रूप से स्पाइनल कॉर्ड यानी रीढ़ की नसों में गंभीर चोट लगने की वजह से होता है।

जब गर्दन के पास की नसें प्रभावित होती हैं, तो दिमाग से शरीर के बाकी हिस्सों तक जाने वाले सिग्नल (Harish Rana Euthanasia Case India) रुक जाते हैं। इसका सीधा असर यह होता है कि व्यक्ति न चल सकता है, न हाथ हिला सकता है और न ही रोजमर्रा के काम खुद से कर पाता है।

कैसे होता है यह कंडीशन, कौन लोग ज्यादा जोखिम में

डॉक्टरों के अनुसार, यह बीमारी आमतौर पर अचानक हुए हादसों से जुड़ी होती है।

ऊंचाई से गिरना

तेज रफ्तार वाहन दुर्घटना

गर्दन या रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट

स्पाइनल कॉर्ड में ट्यूमर या ब्लीडिंग

खासकर तेज गति से वाहन चलाने वाले या जोखिम भरे हालात में रहने वाले लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है।

शरीर पर क्या असर पड़ता है, क्यों मुश्किल हो जाता है जीवन(Harish Rana Euthanasia Case India)

इस स्थिति में मरीज पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो जाता है।

हाथ-पैरों की मूवमेंट खत्म हो जाती है

शरीर में संवेदना कम या खत्म हो जाती है

पेशाब और मल त्याग का नियंत्रण नहीं रहता

लंबे समय तक लेटे रहने से घाव (बेड सोर्स) बनने लगते हैं

कई मामलों में मरीज को यह भी पता नहीं चलता कि उसके आसपास क्या हो रहा है, खासकर जब वह वेजिटेटिव स्टेट में पहुंच जाता है।

इलाज संभव है या नहीं, डॉक्टर क्या कहते हैं

क्वाड्रिप्लेजिया का इलाज पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि स्पाइनल कॉर्ड को कितना नुकसान पहुंचा है।

कुछ मामलों में सर्जरी और फिजियोथेरेपी से सुधार की संभावना (Harish Rana Euthanasia Case India) रहती है, लेकिन अगर नसें स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी हों, तो पूरी तरह ठीक होना बेहद मुश्किल हो जाता है।

हरीश राणा केस क्यों बना बड़ा उदाहरण

हरीश राणा का मामला इसलिए खास बन गया क्योंकि इसमें मेडिकल स्थिति के साथ-साथ कानूनी पहलू भी जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इच्छामृत्यु की अनुमति दिए जाने के बाद यह मामला न केवल स्वास्थ्य बल्कि कानून और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन की बहस को भी सामने लाता है।

यह घटना एक चेतावनी भी है – खासतौर पर तेज रफ्तार और लापरवाही से होने वाले हादसों के प्रति-जो एक पल में जिंदगी को पूरी तरह बदल सकते हैं।

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