गुड़ी पड़वा 2025: गुड़ी लगाते और उतारते समय शास्त्रों में बताए गए इन नियमों का पालन अवश्य करें!

-गुड़ी ध्वज का प्रतीक है, इसलिए इसे उचित सम्मान दिया जाना चाहिए
-गुड़ी को शास्त्रोक्त तरीके से उठाएं और शाम को उतार लें।

Gudi Padwa 2025: 30 मार्च को गुड़ी पड़वा मनाया जाएगा, जो हिंदू नववर्ष का पहला दिन है। हम इस दिन गुड़ी बनाकर मनाते हैं। आइए जानें कि शास्त्रों में इसे कैसे स्थापित किया जाए, इसकी पूजा कैसे की जाए, इसे कब उतारा जाए, तथा गुड़ी पड़वा पर क्या किया जाए, इस बारे में क्या कहा गया है। आपने पढ़ा होगा कि चैत्र शुद्ध प्रतिपदा का पहला दिन शालिवाहन शक का पहला दिन होता है। इस दिन परिवार के सभी पुरुषों और महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए।

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पहले घर साफ़ कर लें। मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर रंगोली बनानी चाहिए। आम के पत्तों और गेंदे के फूलों की माला दरवाजे पर बांधनी चाहिए। घर के बुजुर्ग व्यक्ति को भक्तिभाव से देवताओं की पूजा करनी चाहिए। एक दिन पहले खरीदी गई ईख की छड़ी लाएँ, उसे धोएँ, उसके सिरे पर एक साफ कपड़ा और सुगंधित फूलों की माला बाँधें, और उस पर एक चांदी की कटोरी, लोटी या फूलदान लटका दें। इसके बाद परिवार के सभी सदस्यों की उपस्थिति में गुड़ी स्थापित की जानी चाहिए। धार्मिक ग्रंथों में इसे ब्रह्मध्वज कहा गया है।

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फिर इस गुड़ी की भक्तिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। इसके बाद, नीम के छोटे पत्तों को तोड़कर उनमें काली मिर्च, चना दाल, अंडा, नमक आदि मिलाएं और मिश्रण को थोड़ा-थोड़ा करके सभी सदस्यों को दें। नीम खाने वाले का शरीर कांतिवान और स्वस्थ हो जाता है। इसके बाद पूरे परिवार को गांव के राम मंदिर में जाकर पूरे मन से भगवान रामचंद्र का दर्शन करना चाहिए। हालांकि, अगर वर्तमान स्थिति में मंदिर तक पहुंच नहीं है, तो घर पर भगवान राम की छवि को नमन करना चाहिए और उस पर माल्यार्पण करके पूजा करनी चाहिए। चैत्र नवरात्रि गुड़ी पड़वा से शुरू होती है। यह नवरात्रि देवी और राम की नवरात्रि के रूप में मनाई जाती है। यह नवरात्रि राम नवमी को समाप्त होती है।

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एक दिन पहले बाजार से नया पंचांग खरीद लेना चाहिए। गुड़ी पड़वा के दिन इसकी पूजा करनी चाहिए और परिवार के सभी सदस्यों की उपस्थिति में वार्षिक परिणाम पढऩा चाहिए। दोपहर के समय सभी को एक साथ मिलकर स्वादिष्ट भोजन करना चाहिए और दिन को खुशी से बिताना चाहिए, ताकि आने वाले पूरे वर्ष खुशी प्राप्त हो। सूर्यास्त से पहले गुड़ी पर हल्दी, केसर और अक्षत डालना चाहिए। फिर गुड़ी को हटा दें। हम सभी हिन्दू भाई-बहन चैत्र प्रतिपदा यानि गुड़ी पड़वा को साढ़े तीन शुभ मुहूर्तों में से एक मानते हैं। इसलिए इस दिन नया काम शुरू करने की प्रथा है। इस दिन सभी सगे-संबंधियों को सुखी, समृद्ध, आनन्दमय, स्वस्थ एवं खुशहाल नववर्ष की कामना करनी चाहिए तथा हर्षोल्लास के साथ नववर्ष का स्वागत करना चाहिए।

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