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Great Nicobar Project 81000 Crore : 81,000 करोड़ के ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट को NGT की मंजूरी, हिंद महासागर में भारत की ताकत बढ़ाने की तैयारी

Great Nicobar Project 81000 Crore

Great Nicobar Project 81000 Crore

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (Great Nicobar Project 81000 Crore) की छह सदस्यीय विशेष पीठ ने 81,000 करोड़ रुपये के ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि प्रोजेक्ट को दी गई पर्यावरणीय मंजूरी में पर्याप्त सुरक्षा उपाय शामिल हैं और उसमें हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं है।

यह प्रोजेक्ट अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के ग्रेट निकोबार द्वीप पर 166 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इसके तहत 130 वर्ग किलोमीटर वन भूमि के डायवर्जन और लगभग 10 लाख पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव है।

क्या-क्या बनेगा इस मेगा प्रोजेक्ट में?

सरकार इस परियोजना के तहत एक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, इंटीग्रेटेड टाउनशिप, सिविल और मिलिट्री उपयोग वाला एयरपोर्ट और 450 MVA क्षमता का गैस व सोलर पावर प्लांट विकसित करेगी। यह परियोजना लॉजिस्टिक्स, रक्षा और ऊर्जा – तीनों क्षेत्रों में रणनीतिक बदलाव लाने वाली मानी जा रही है।

एनजीटी ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण मंजूरी में लेदरबैक समुद्री कछुए, निकोबार मेगापोड, खारे पानी के मगरमच्छ, रॉबर केकड़ा और निकोबार मकाक जैसी दुर्लभ प्रजातियों की सुरक्षा के लिए विशेष शर्तें शामिल (Great Nicobar Project 81000 Crore) की गई हैं। साथ ही सरकार को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि फोरशोर डेवलपमेंट से तटीय कटाव या रेतीले बीच को नुकसान न पहुंचे।

भारत के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?

ग्रेट निकोबार द्वीप मलक्का जलडमरूमध्य के बेहद करीब स्थित है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इस रणनीतिक लोकेशन के कारण भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी सामरिक और आर्थिक स्थिति को और मजबूत कर सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रांसशिपमेंट पोर्ट भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में बड़ा खिलाड़ी बनाएगा। साथ ही सैन्य दृष्टि से यह क्षेत्र बेहद (Great Nicobar Project 81000 Crore) अहम है, जहां से हिंद महासागर में चीन की गतिविधियों पर निगरानी रखना आसान होगा। आपदा या युद्ध जैसी स्थिति में यह द्वीप भारत को तेज प्रतिक्रिया और सामरिक बढ़त देगा।

एनजीटी ने यह भी कहा है कि सरकार पर्यावरणीय शर्तों से बाध्य होगी और किसी भी प्रकार के उल्लंघन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस तरह ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता दिख रहा है।

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