छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका अपने तीन दिवसीय जशपुर प्रवास के दौरान आज एक अलग ही आध्यात्मिक स्वरूप (Governor Ramen Deka Jashpur Visit) में नजर आए। अपने दौरे के दूसरे दिन राज्यपाल प्रसिद्ध अघोर पीठ ‘सोगड़ा’ पहुंचे, जो न केवल आस्था का केंद्र है बल्कि दशकों से मानवता और पर्यावरण संरक्षण की मशाल थामे हुए है। राज्यपाल ने यहाँ अघोर संप्रदाय की परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की और आश्रम के प्रमुख बाबा संभवराम से मुलाकात कर लोक कल्याण के विषयों पर चर्चा की।
सोगड़ा आश्रम पहुँचते ही राज्यपाल ने सबसे पहले अघोर संत पूज्यपाद औघड़ भगवान राम जी के समाधि स्थल पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और विधि-विधान से परिक्रमा की। इसके पश्चात उन्होंने आश्रम स्थित मां काली के मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।
बाबा संभवराम से मुलाकात और आध्यात्मिक संवाद (Governor Ramen Deka Jashpur Visit)
पूजा-अर्चना के बाद राज्यपाल रमेन डेका ने सर्वेश्वरी समूह और भगवान राम ट्रस्ट के प्रमुख, गुरुपद बाबा संभवराम जी के दर्शन किए। राज्यपाल ने उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया और आश्रम द्वारा चलाए जा रहे लोकहित के कार्यों की जानकारी ली। बाबा संभवराम के नेतृत्व में यह आश्रम न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश के कई राज्यों में स्वास्थ्य और समाज सेवा के क्षेत्र में मिसाल पेश कर रहा है।
सेवा का वह प्रकल्प, जिसका नाम ‘लिम्का बुक’ में है दर्ज
सोगड़ा आश्रम और सर्वेश्वरी समूह की पहचान केवल अध्यात्म तक सीमित नहीं है। यह समूह पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय से कुष्ठ रोगियों की सेवा में समर्पित है। कुष्ठ उन्मूलन के क्षेत्र में इनके अभूतपूर्व योगदान के कारण ही संस्था का नाम ‘लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज हो चुका है। मानवता के प्रति इसी अटूट समर्पण के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने इस समूह को प्रतिष्ठित ‘पंडित रविशंकर शुक्ल सद्भावना पुरस्कार’ से भी नवाजा है।
स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मुहिम
राज्यपाल ने आश्रम द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की सराहना (Governor Ramen Deka Jashpur Visit) की। उल्लेखनीय है कि बाबा संभवराम की देखरेख में आश्रम द्वारा:
निशुल्क चिकित्सा: मोतियाबिंद का उपचार, चश्मा वितरण और मेडिकल कैंप आयोजित किए जाते हैं।
मिर्गी का उपचार: आश्रम आयुर्वेदिक पद्धति और विशेष जड़ी-बूटियों के माध्यम से वर्षों से मिर्गी का सफल इलाज कर रहा है।
पर्यावरण रक्षा: पेड़ों की कटाई रोकने के लिए बाबा संभवराम स्वयं गंभीर रहते हैं। यही कारण है कि आदिवासी क्षेत्रों में ईंधन के लिए पेड़ों को कटने से बचाने हेतु बड़े पैमाने पर ‘सोलर चूल्हों’ का वितरण किया जाता है।
राष्ट्र प्रथम और टूटते परिवारों की चिंता
मुलाकात के दौरान बाबा संभवराम के विचारों ने राज्यपाल को विशेष रूप से प्रभावित किया। बाबा जी अपने प्रवचनों में हमेशा ‘राष्ट्र सर्वोपरि‘ की भावना (Governor Ramen Deka Jashpur Visit) पर बल देते हैं। समाज में टूटते परिवारों और बिखरते सामाजिक ताने-बाने को लेकर वे सदैव चिंतित रहते हैं और भक्तों को संस्कारवान जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। राज्यपाल के इस दौरे ने न केवल जशपुर की आध्यात्मिक महत्ता को रेखांकित किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि शासन और अध्यात्म मिलकर समाज सुधार की दिशा में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
