Gold Loan India : तीन साल में गोल्ड लोन चार गुना बढ़ा, ग्रामीण व अर्ध-शहरी भारत से मांग में उछाल

पिछले तीन सालों में भारत में गोल्ड लोन (Gold Loan India) लगभग चार गुना बढ़ गए हैं। इसका मुख्य कारण सोने की बढ़ती कीमतें और अर्ध-शहरी तथा ग्रामीण भारत से लगातार बढ़ती मांग है। एंटीक स्टाक ब्रोकिंग द्वारा आयोजित बीएफएसआइ कांफ्रेंस 2025 (BFSI Conference 2025) में विशेषज्ञों ने बताया कि अब 60 प्रतिशत से अधिक नए खुदरा कर्ज की मांग इन इलाकों से आ रही है।

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देश के अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सोना परंपरागत रूप से कोलैटरल के तौर पर स्वीकार किया जाता है। रिपोर्ट में यह भी चिंता जताई गई है कि इन क्षेत्रों में डिफाल्ट की संभावना भी ज्यादा है। अक्टूबर 2025 के अंत तक गोल्ड लोन पर कुल बकाया राशि (Gold Loan Outstanding) साल-दर-साल 128.5% बढ़कर 3.38 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गई है।

विशेषज्ञों ने कहा कि अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गोल्ड लोन (Gold Loan Growth) असुरक्षित ऋण की बजाय तेजी से वितरण, लचीला पुनर्भुगतान विकल्प और कम ब्याज दर के कारण पसंद किया जाता है। यह विकास का अच्छा जरिया बन गया है, खासकर ऐसे समय में जब पूरे सिस्टम में फंसे हुए कर्जों के लिए नियम कड़े कर दिए गए हैं।

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कई बैंकों ने अगले दो वर्षों में गोल्ड लोन वितरण को अपने ब्रांच नेटवर्क में और बढ़ाने की योजना बनाई है। आरबीआइ की हालिया रिपोर्ट में भी कहा गया है कि फरवरी 2025 से ज्वेलेरी पर लोन में तीन अंकों की वृद्धि हुई है, जो कुल कर्ज में हुई वृद्धि से कहीं ज्यादा है।

हालांकि गोल्ड लोन अभी भी कुल गैर-खाद्य कर्ज का छोटा हिस्सा है, लेकिन पिछले एक साल में इसका हिस्सा लगभग दोगुना हो गया है। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि कर्ज लेने की प्रवृत्ति में बदलाव आया है और ग्रामीण भारत में गोल्ड लोन की लोकप्रियता बढ़ रही है।

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