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Forest Legal Awareness Training : वन अपराधियों पर सख्त शिकंजे की तैयारी, विधिक साक्षरता से मजबूत होंगे वन विभाग के प्रकरण

Forest Legal Awareness Training

राज्य के वन क्षेत्रों में अवैध शिकार, लकड़ी तस्करी और वन्यजीवों से जुड़े अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए वन विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। कई मामलों में अपराधियों को मौके पर पकड़ा भी जाता है, लेकिन कानूनी प्रावधानों की संपूर्ण जानकारी और प्रक्रियात्मक मजबूती के अभाव में कई बार मजबूत प्रकरण तैयार नहीं हो पाता।

इसका सीधा लाभ अपराधियों को मिलता है, जो तकनीकी आधार पर न्यायालय से राहत हासिल कर लेते हैं। इसी कमजोरी को दूर करने और विभागीय कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम (Forest Legal Awareness Training) को प्राथमिकता दी जा रही है।

वन विभाग का मानना है कि केवल फील्ड में कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कानून की गहरी और व्यावहारिक समझ भी उतनी ही आवश्यक है। जब तक वनकर्मी कानून की धाराओं, नियमों और अदालती प्रक्रियाओं से पूरी तरह परिचित नहीं होंगे, तब तक वन अपराधों पर स्थायी और निर्णायक नियंत्रण संभव नहीं है। इसी सोच के तहत विभाग द्वारा योजनाबद्ध तरीके से विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम (Forest Legal Awareness Training) आयोजित किए जा रहे हैं।

प्रशिक्षण का उद्देश्य

वन अपराधों के मामलों में तकनीकी खामियों को दूर करना, विवेचना को मजबूत बनाना और न्यायालय में टिकाऊ व प्रभावी प्रकरण प्रस्तुत करने के लिए वनकर्मियों को विधिक रूप से सक्षम बनाना। इस दिशा में वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के निर्देशानुसार वन विभाग के कर्मचारियों के लिए विधिक साक्षरता कार्यशालाओं की श्रृंखला चलाई जा रही है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में फील्ड स्तर पर आने वाली वास्तविक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कानून की व्याख्या की जा रही है, ताकि कार्रवाई के हर चरण में विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम (Forest Legal Awareness Training) का सीधा लाभ मिल सके।

इसी क्रम में दिसंबर माह के दौरान वनमण्डल कार्यालय दुर्ग के सभागार में “प्रोटेक्ट टुडे एंड सिक्योर टुमारो” परियोजना के अंतर्गत एक दिवसीय विधिक साक्षरता कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के सहयोग से संपन्न हुआ। जिला न्यायालय दुर्ग के काउंसलर चंद्राकर ने मुख्य वक्ता के रूप में वन एवं वन्यजीव संरक्षण से संबंधित कानूनों, नियमों और अदालती प्रक्रियाओं की विस्तार से जानकारी दी तथा विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम (Forest Legal Awareness Training) के महत्व को रेखांकित किया।

कानूनी प्रावधानों पर फोकस

भारतीय वन अधिनियम 1927 और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की प्रमुख धाराएं, जब्ती प्रक्रिया, साक्ष्य संकलन और विभागीय कार्रवाई के चरणों पर विशेष चर्चा। कार्यशाला के दौरान भारतीय वन अधिनियम, 1927 तथा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के महत्वपूर्ण प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।

विशेषज्ञों द्वारा आरक्षित और संरक्षित वनों से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं, अपराध की श्रेणियों और विभागीय कार्रवाई की विधियों को सरल भाषा में समझाया गया। इसके साथ ही राजस्व क्षेत्रों में होने वाले वन अपराधों की रोकथाम और नियंत्रण के उपायों पर भी जानकारी दी गई, ताकि विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम (Forest Legal Awareness Training) केवल सैद्धांतिक न रहकर व्यावहारिक रूप से उपयोगी सिद्ध हो सके।

प्रशिक्षण के एक विशेष सत्र में नालसा के विशेषज्ञों ने अदालती मामलों के प्रबंधन से जुड़े “क्या करें और क्या न करें” विषय पर व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया। पंचनामा, जब्ती सूची, बयान और केस डायरी तैयार करते समय किन कानूनी बिंदुओं का पालन अनिवार्य है, इस पर विस्तार से चर्चा की गई। यह स्पष्ट किया गया कि मजबूत दस्तावेजी साक्ष्य ही अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बुनियाद बनते हैं और विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम (Forest Legal Awareness Training) इसी दिशा में वनकर्मियों को सशक्त बनाता है।

(Forest Legal Awareness Training) व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा

वन परिक्षेत्र अधिकारी दुर्ग एवं धमधा सहित वनमण्डल के सभी कार्यपालिक और क्षेत्रीय अधिकारी-कर्मचारी कार्यशाला में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर अधिकारियों ने विश्वास जताया कि इस तरह के निरंतर प्रशिक्षण से वनकर्मी विधिक रूप से अधिक सजग और सक्षम होंगे। इससे वन अपराधों के मामलों में तकनीकी कमियां दूर होंगी और अपराधियों के विरुद्ध सख्त व प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी। वन्यजीव और वन संपदा की सुरक्षा को लेकर विभाग ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम (Forest Legal Awareness Training) को और व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।

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