पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक उथल-पुथल और अमेरिका-ईरान युद्ध की तपिश अब सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था की तिजोरी तक पहुँचने (Fitch Ratings India GDP 2026) लगी है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए भारत की विकास दर के अनुमान पर बेरहमी से कैंची चलाते हुए इसे 6.7 प्रतिशत से घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है। रेटिंग एजेंसी के इस ताजा आंकड़े ने यह साफ कर दिया है कि दुनिया के किसी एक कोने में छिड़ी जंग का खामियाजा अंततः भारत के आम आदमी और उसके बाजार को अपनी जेब ढीली करके भुगतना पड़ेगा।
फिच की इस रिपोर्ट के पीछे की कड़वी सच्चाई यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इस तेल संकट के कारण भारत में रोजमर्रा की चीजें महंगी हो रही हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं की वास्तविक आय घट रही है। जब लोगों के हाथ में पैसा ही नहीं बचेगा, तो वे बाजार में खर्च कहाँ से करेंगे? यही वजह है कि फिच का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी और तीसरी तिमाही यानी सितंबर और दिसंबर के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा सुस्ती देखने को मिलेगी। हालांकि, राहत की बात बस इतनी है कि सरकार की तरफ से बुनियादी ढांचे पर किया जाने वाला पूंजीगत खर्च अभी भी अपनी जगह मजबूत खड़ा हुआ है।
जब RBI ने भी जता दी थी चिंता : Fitch Ratings India GDP 2026
भारतीय बाजारों को झटका देने वाली फिच कोई पहली संस्था नहीं है। पिछले ही हफ्ते देश के केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी ठीक इसी तरह के खतरे का अंदेशा जताया था। आरबीआई ने भी अपने विकास अनुमान को घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया था और साफ चेतावनी दी थी कि आने वाले दिनों में महंगाई की दर 5.1 प्रतिशत के पार जा सकती है। अब फिच के इस ताजा अनुमान ने रिजर्व बैंक की उस आशंका पर अपनी पक्की मुहर लगा दी है।
लेकिन इस चौतरफा निराशा के बीच एक उम्मीद की किरण (Fitch Ratings India GDP 2026) भी है। फिच के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन कोल्टन का मानना है कि यह सुस्ती अस्थायी है। जैसे ही महंगी ऊर्जा और कच्चे तेल का यह वैश्विक दबाव कम होगा, अगले वित्त वर्ष में भारतीय बाजार एक बार फिर अंगड़ाई लेकर उठ खड़ा होगा और मजबूत उपभोक्ता मांग के दम पर देश की विकास दर दोबारा 6.7 प्रतिशत की रफ्तार पकड़ लेगी।
पूरी दुनिया पर पड़ा असर
इस युद्ध ने केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की कमर तोड़ी है। फिच ने साल 2026 के लिए वैश्विक विकास दर (Global Growth) का अनुमान भी 0.2 प्रतिशत घटाकर महज 2.4 प्रतिशत कर दिया है। फिच के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन कोल्टन का कहना है कि कच्चे तेल के दामों में उछाल ने दुनिया भर की तरक्की के सामने जोखिम बढ़ा दिया है, हालांकि सूचना-प्रौद्योगिकी (IT Sector) पर हो रहे भारी खर्च की वजह से फिलहाल वैश्विक आर्थिक गतिविधियों को थोड़ी राहत जरूर मिल रही है।
