दशकों से छत्तीसगढ़ के माथे पर लगा लाल आतंक का काला टीका आखिरकार मिट ही गया। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आदिवासी बहुल बस्तर से नक्सलियों का सफाया करने के लिए 31 मार्च 2026 की जो डेडलाइन घोषित की थी उस दिन इस लक्ष्य को हासिल करके केन्द्र और राज्य सरकार ने एक एतिहासिक उपलब्धि प्राप्त कर ली।
अब छत्तीसगढ़ पूर्ण रूप से नक्सली आतंक के साये से मुक्त हो गया है। गौरतलब है कि नवप्रदेश छत्तीसगढ़ को इसके पृथक राज्य के रूप में अस्तित्व में आने के दौरान नक्सली समस्या अविभाजित मध्यप्रदेश से विरासत के रूप में मिली थी। 2003 से ही नक्सली उन्मूलन के लिए तात्कालीन राज्य सरकारों ने अपनी ओर से हर संभव ्रप्रयास किये।
खासतौर पर 2003 में जब डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में नवप्रदेश छत्तीसगढ़ में पहली बार एक निर्वाचित सरकार का गठन हुआ तो उनके 15 साल के कार्यकाल के दौरान नक्सल प्रभावित बस्तर और सरगुजा संभाग में नक्सलियों के खिलाफ सुनियोजित परिणाम छेड़ा गया। जिसका सुपरिणाम यह निकला की सरगुजा संभाग को नक्सली समस्या से मुक्त करने में तात्कालीन डॉ. रमन सिंह की सरकार सफल हो गई।
बस्तर में भी नक्सली उन्मूलन अभियान ने गति पकड़ी थी लेकिन इस बीच चुनाव में भाजपा को सत्ता से बाहर होना पड़ा और कांग्रेस की सरकार बनने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार और केन्द्र सरकार के बीच उचित सामन्जसय न बन पाने के कारण नक्सली उन्मूलन अभियान की गति धीमी पड़ गई किन्तु जैसे ही विष्णुदेव साय के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी तो बस्तर से नक्सली उन्मूलन के लिए वृहद कार्य योजना बनी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दिशा निर्देश पर नक्सलियों के खिलाफ खंदक शुरू कर दी गई।
इस केन्द्रय सुरक्षाबलों के जवानों और छत्तीसगढ़ के जवानों ने भी अपने प्राणों की आहूति दी लेकिन नक्सलियों के पैर उखाडऩे में हमारे बहादूर जवान सफल रहे उनकी सहादत को सलाम। केन्द्र और राज्य सरकार ने दृढ़ संकल्प ले लिया कि हर हाल में 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को लाल आतंक के अभिशाप से मुक्ति दिलानी है और वे इसमें अंतत: सफल हुए इस बारे मेें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सही कहा है कि डबल इंजन सरकार की ताकत से ही नक्सलवाद का खात्मा हुआ है और यह इस प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक दिन बन गया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह ने भी इसके लिए विष्णुदेव की पीठ थपथपाई है और उन्होंने इस सफलता को सटीक रणनीति का परिणाम बताया है। वास्तव में नक्सली उन्मूलन का यह अभियान मात्र दो साल की अवधि के भीतर इसलिए सफल हो पाया क्योंकि इसके लिए दृढ़ इच्छा शक्ति का परिचय दिया और इसके लिए सटीक रणनीति बनाकर उस पर अमल किया गया।
राज्य और केन्द्र में एक ही पार्टी की सरकार होने के कारण तथा केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा खुद इसकी कमान संभाल लेने की वजह से ही निधारित समय सीमा के भीतर इस दुरूह अभियान को सफलता मिल पाई है। केन्द्रीय मंत्री अमित शाह लगातार छत्तीसगढ़ प्रवास पर आते रहे। नक्सल प्रभावित बस्तर का भी दौरा करते रहे और नक्सल अभियान की भी समीक्षा करने साथ ही केन्द्रीय सुरक्षा बलों और छत्तीसढ़ पुलिस के जवानों की हौसला अफजाई करते रहे। यही वजह है कि नक्सलियों के साथ जब निर्णायक लड़ाई का शंखनाद किया गया तो बड़ी संख्या में नक्सली मुठभेड़ में ढेर होने लगे और उनकी गिरफ्तारी भी होने लगी। इससे नक्सलियों ने आत्मसमपर्ण करना भी शुरू कर दिया।
छत्तीसगढ़ सरकार ने आत्मसमर्पण करने वालों नक्सलियों के लिए नई आत्मसमर्पण नीति भी लागू कि जिससे प्रभावित होकर अपने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करना शुरू कर दिया। इसमें छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। यही नहीं बल्कि नक्सली उन्मूलन अभियान को सफल बनाने में बस्तर के जाबाज आईजी सुंदरराज पी की भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है जो लगातार सुरक्षाबलों का हौसला बढ़ाते रहे।
बहरहाल अब नक्सली आंतक के खात्में के बाद कभी पूरे देश में सर्वाधिक पिछड़े क्षेत्रों में गिने जाने वाले बस्तर क्षेत्र में अब विकास का बयार का बहना तय हो गया है। अब वहां के आदिवासी भाई खुली हवा में सांस ले सकेंगे और उन तक अब सरकार भी विकास की रौशनी पहुंचा सकेगी। उम्मीद की जानी चाहिए कि अब बस्तर में फिर से नक्सलवाद अपना सिर नहीं उठा पाएगा और इसके लिए सरकार को अभी भी वहां सतर्कता बरतनी होगी तथा एहतियाती कदम उठाये रखने होंगे।
