एनसीईआरटी की किताबों को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार को डोमेन एक्सपर्ट कमेटी गठित करने का निर्देश (Education Policy Court) दिया है। अदालत ने कहा है कि एक सप्ताह के भीतर विशेषज्ञों की समिति बनाई जाए, जो इस पूरे मामले की समीक्षा कर उचित सुझाव दे।
मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि समिति में एक पूर्व न्यायाधीश, एक शिक्षाविद और कानून के क्षेत्र के विशेषज्ञ को शामिल किया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि कानूनी अध्ययन से जुड़ी सामग्री तैयार करने के लिए National Judicial Academy से भी परामर्श लिया जा सकता है।
विवादित अध्याय से जुड़े लोगों को पाठ्यक्रम से दूर रखने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 8 की विवादित पाठ्यपुस्तक के मामले में यह भी निर्देश दिया कि प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, शिक्षक सुपर्णा दिवाकर और कानूनी शोधकर्ता आलोक प्रसन्ना कुमार को फिलहाल स्कूल पाठ्यक्रम तैयार करने की किसी भी प्रक्रिया से अलग रखा जाए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित व्यक्ति आदेश में बदलाव चाहते हैं तो वे कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में याचिका दाखिल कर सकते हैं।
सोशल मीडिया पर न्यायपालिका को बदनाम करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश
सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से यह भी कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर न्यायपालिका के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां करने वालों की पहचान कर कार्रवाई की जाए।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा और यह भी देखा जाएगा कि क्या उन्होंने बिना शर्त माफी मांगी है या नहीं।
अदालत ने कहा कि संस्थाओं में यदि किसी तरह की कमियां हैं और उनकी ओर संकेत किया जाता है, तो इससे भविष्य में न्यायपालिका और कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
