छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले (ED Investigation Chhattisgarh) में गिरफ्तार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से 10 दिनों के भीतर जवाब मांगा है।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जायमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि यह मामला केवल गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि पीएमएलए अधिनियम की संवैधानिक व्याख्या से जुड़ा है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की है।\
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि ईडी ने बिना किसी नोटिस या समन के ही चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया। उन्होंने तर्क दिया कि एजेंसी ने “जांच में सहयोग नहीं” करने को गिरफ्तारी का आधार बना लिया, जो कानून के प्रावधानों के खिलाफ है। वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने भी कोर्ट को बताया कि ईडी जांच को जानबूझकर लंबा खींच रही है ताकि अभियुक्तों पर दबाव बनाया जा सके।
ईडी ने जुलाई 2025 में चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उन्होंने राज्य में शराब वितरण प्रणाली के जरिए अवैध लेन-देन और धन शोधन (ED Investigation Chhattisgarh) में भूमिका निभाई। ईडी की रिपोर्ट के मुताबिक, 3,200 करोड़ रुपये के इस घोटाले में राजनेता, ठेकेदार और शराब कारोबारी शामिल हैं।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह मामला जांच एजेंसियों की शक्तियों और अभियुक्त के अधिकारों के बीच संतुलन से जुड़ा है। जस्टिस बागची ने कहा “हम यह जानना चाहते हैं कि क्या एजेंसी अनिश्चितकाल तक किसी को हिरासत में रख सकती है? कानून में इसकी सीमा तय होनी चाहिए।” अब केंद्र और ईडी को 10 दिन के भीतर लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने कहा कि अगले चरण में यह जांच की जाएगी कि ईडी की कार्रवाई (ED Investigation Chhattisgarh) संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित मौलिक अधिकारों के अनुरूप है या नहीं।

