कुत्तों की नसबंदी पर संशय, टेंडर होने के बाद भी शुरू नहीं हुआ काम

अनिल सामंत
जगदलपुर/नवप्रदेश।
जगदलपुर नगर निगम एक बार फिर आवारा कुत्तों की नसबंदी के नाम पर बड़ा अभियान शुरू करने जा रहा है, लेकिन सवाल वही पुराना है… क्या इस बार नतीजे बदलेंगे? शहर में डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं और जनता के आक्रोश को शांत करने के लिए कंगोली स्थित पुराने डंपिंग यार्ड में पूरी तैयारी कर ली गई है। शेड, केज और अन्य व्यवस्थाएं लगभग तैयार हैं और चंडीगढ़ की एक एनजीओ को राज्य स्तर के टेंडर के बाद जिम्मेदारी सौंप दी गई है। दावा है कि एक सप्ताह के भीतर अभियान शुरू हो जाएगा।

निगम का दावा फेल हुआ और माहभर बाद भी टेंडर प्रक्रिया पूरा होने के बाद एजेंसी नहीं पहुंचा है। हालांकि, दो साल पहले कांग्रेस सरकार के दौरान भी ऐसा ही अभियान चला था, जिसमें लगभग 450 कुत्तों की नसबंदी की गई, लेकिन पोस्ट ऑपरेटिव केयर के अभाव में अधिकांश केस फेल हो गए।

इससे न केवल कुत्तों की मौत हुई, बल्कि शहर में उनकी संख्या भी कम नहीं हो सकी। इस बार निगम ने करीब 5000 कुत्तों की नसबंदी का लक्ष्य तय किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में इस तरह के ऑपरेशन सफल नहीं होते। बावजूद इसके अभियान शुरू करने की तैयारी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले हैदराबाद की एजेंसियां भी दो बार यह काम कर चुकी हैं, लेकिन हर बार परिणाम निराशाजनक ही रहे। स्थिति यह रही कि नसबंदी के बाद भी शहर में आवारा कुत्तों की संख्या घटने के बजाय बढ़ती ही गई।

कंगोली डंपिंग यार्ड बना नसबंदी केंद्र
नगर निगम स्वच्छता समिति के सभापति लक्ष्मण झा ने बताया कि राज्य स्तर पर टेंडर के बाद चंडीगढ़ की संस्था को काम सौंपा गया है और जल्द ही टीम जगदलपुर पहुंचेगी। नगर निगम ने कंगोली स्थित पुराने डंपिंग यार्ड को नसबंदी केंद्र के रूप में विकसित किया है, जहां शेड, पिंजरे और अन्य जरूरी सुविधाएं तैयार की गई हैं।

वर्जन : – पोस्ट ऑपरेटिंग केयर की आवश्यकता
नसबंदी के बाद कम से कम एक सप्ताह तक पोस्ट ऑपरेटिव केयर बेहद जरूरी है, अन्यथा संक्रमण और मौत का खतरा बना रहता है। – डॉ केके देव, सहायक संचालक, पशु चिकित्सा, बस्तर

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