Delhi High Court Pension Order : दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश देते हुए साफ किया है कि यदि पति-पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद रहा हो, लेकिन तलाक की स्थिति न बनी हो, तो पति की मृत्यु के बाद पत्नी को पारिवारिक पेंशन (Family Pension Case) से वंचित नहीं किया जा सकता।
यह फैसला न्यायमूर्ति नवीन चावला और मधु जैन की खंडपीठ ने एक महिला की याचिका पर सुनाया। याचिकाकर्ता के पति का निधन वर्ष 2009 में हुआ था। महिला ने 2013 में पेंशन की मांग की, लेकिन केंद्र सरकार ने यह कहकर आपत्ति जताई कि मृतक ने पारिवारिक सूची में पत्नी का नाम दर्ज नहीं कराया था और दोनों के बीच विवाद चल रहा था।
अदालत का स्पष्ट रुख
न्यायालय ने कहा कि विवाह वैध होने पर पत्नी का अधिकार खत्म नहीं होता।
भरण-पोषण की मांग यह साबित करती है कि संबंध कानूनी रूप से कायम थे।
पेंशन आवेदन में देरी होना पत्नी के संवैधानिक हक को प्रभावित नहीं कर सकता।
आदेश के मुख्य बिंदु
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) ने पहले महिला को पेंशन(Delhi High Court Pension Order) दी थी, लेकिन 2014 से लागू किया था।
हाईकोर्ट ने CAT का आदेश निरस्त करते हुए कहा कि पेंशन 2009 से ही मिलेगी।
केंद्र सरकार को चार माह के भीतर ब्याज सहित बकाया राशि का भुगतान करने का निर्देश।
सामाजिक महत्व
यह फैसला उन महिलाओं के लिए राहत लेकर आया है जो वैवाहिक विवाद की वजह से अपने वैध अधिकारों से वंचित की जाती हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल विवाद होना तलाक के बराबर नहीं है, और पत्नी का फैमिली पेंशन पर कानूनी हक बरकरार रहेगा।