हरियाणा की पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश को गौरवान्वित (CWG 2026) किया है। लेकिन इस जीत के पीछे संघर्ष, त्याग और हौसले की ऐसी कहानी है, जिसने हर मुश्किल को मात देकर इतिहास रच दिया।
महेंद्रगढ़ की रहने वाली शर्मिला धनखड़ ने महिला पैरा शॉट पुट F57 स्पर्धा में 9.81 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उपलब्धि उनके लंबे संघर्ष और लगातार मेहनत का नतीजा मानी जा रही है।
बचपन से संघर्षों का सामना CWG 2026
शर्मिला धनखड़ को महज दो साल की उम्र में पोलियो हो गया था, जिससे उनका एक पैर प्रभावित हो गया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में जन्मी शर्मिला के पिता छोटे किसान थे, जबकि उनकी मां दृष्टिबाधित थीं। संसाधनों की कमी के कारण उनका बेहतर इलाज नहीं हो सका और कम उम्र में उनकी शादी कर दी गई।
जिंदगी ने दिए कई बड़े झटके
26 साल की उम्र में पहले पति से अलगाव के बाद शर्मिला अपनी दो बेटियों के साथ मायके लौट आईं। बाद में उनकी दूसरी शादी अजीत से हुई, जिन्होंने उन्हें पैरा एथलेटिक्स में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और हर कदम पर साथ दिया।
नौकरी गई, घर भी बेचना पड़ा
साल 2018 में हरियाणा रोडवेज की हड़ताल के दौरान उन्हें राज्य की पहली महिला कंडक्टर बनने का मौका मिला, लेकिन हड़ताल समाप्त होने के साथ ही नौकरी भी चली गई। आर्थिक तंगी इतनी बढ़ी कि वर्ष 2023 में ट्रेनिंग का खर्च उठाने के लिए परिवार को अपना घर तक बेचना पड़ा और किराए के मकान में रहना पड़ा।
हार नहीं मानी, गोल्ड जीतकर रचा इतिहास CWG 2026
34 वर्ष की उम्र में उन्होंने कोच टेकचंद और देवेंद्र के मार्गदर्शन में सीटेड शॉट पुट की ट्रेनिंग शुरू की। 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में चौथे स्थान पर रहने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार मेहनत का परिणाम 2026 में मिला, जब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया।
बेटियां भी खेलों में बना रहीं पहचान
शर्मिला की दोनों बेटियां भी खेलों में अपना भविष्य बना (CWG 2026) रही हैं। बड़ी बेटी अनुज जेवलिन थ्रो और छोटी बेटी लक्ष्मी लॉन्ग जंप में राज्य स्तर की खिलाड़ी हैं।
