कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) में नौकरी करने की चाह रखने वालों और वर्तमान में कार्यरत अधिकारियों के लिए एक बहुत बड़ी खबर निकलकर सामने (Coal India Recruitment) आ रही है। मैनेजमेंट ने आने वाले दिनों के लिए भर्ती, प्रमोशन और सालाना मिलने वाली वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) के नियमों में भारी फेरबदल कर दिया है।
यह बदलाव इतना व्यापक है कि अब कैडर के स्ट्रक्चर से लेकर एंट्री लेवल के पदों तक सब कुछ नया नजर आएगा। खास बात यह है कि अब करियर की सीढ़ी चढ़ने के लिए अधिकारियों को कम से कम तीन साल का पसीना बहाना होगा, तभी उन्हें पदोन्नति का लाभ मिल सकेगा।
नई भर्तियों के लिए एंट्री लेवल और सैलरी का नया गणित (Coal India Recruitment)
रेलवे के बाद अब कोल इंडिया ने भी अपने एंट्री लेवल को लेकर स्थिति साफ कर दी है। जारी किए गए ताज़ा आदेश के मुताबिक, अब मेडिकल संवर्ग को छोड़कर बाकी सभी विभागों में जो नई नियुक्तियां होंगी, वो सीधे ई-वन (E-1) ग्रेड पर की जाएंगी। इस ग्रेड के लिए 60,000 रुपये से लेकर 1,80,000 रुपये तक का सैलरी ब्रैकेट तय किया गया है।
हालांकि, डॉक्टरों और मेडिकल विशेषज्ञों के लिए नियम थोड़े अलग हैं। चिकित्सा क्षेत्र में GDMO की सीधी भर्ती ई-टू ग्रेड में होगी और विशेषज्ञों को सीधे ई-थ्री ग्रेड में एंट्री दी जाएगी, जिनका अधिकतम वेतनमान 2,20,000 रुपये तक जाएगा।
प्रबंधन प्रशिक्षु से बनेंगे अधिकारी, बदले जाएंगे पदनाम
सिर्फ नियम ही नहीं बदले हैं, बल्कि अब अधिकारियों को दिए जाने वाले ओहदों यानी पदनामों में भी बदलाव देखने को मिलेगा। पहले साल जब कोई नया अधिकारी जॉइन करेगा, तो उसे ‘प्रबंधन प्रशिक्षु’ (Management Trainee) के तौर पर पहचाना (Coal India Recruitment) जाएगा।
ट्रेनिंग का एक साल सफलतापूर्वक पूरा करते ही उन्हें ‘अधिकारी’ का दर्जा दे दिया जाएगा। इसी तरह, ई-टू ग्रेड में पहुंचने वाले अधिकारियों को अब ‘वरिष्ठ अधिकारी’ के नाम से पुकारा जाएगा। कंपनी का मानना है कि इस बदलाव से कैडर में एक स्पष्ट पदानुक्रम (Hierarchy) नजर आएगा।
प्रमोशन के लिए अब 3 साल की सर्विस अनिवार्य
अगर आप कोल इंडिया में जल्दी-जल्दी प्रमोशन पाने की उम्मीद कर रहे हैं, तो अब आपको थोड़ा धैर्य रखना होगा। नए नियमों के तहत ई-वन और ई-टू ग्रेड में पदोन्नति पाने के लिए अधिकारियों को कम से कम तीन साल की सेवा पूरी करनी (Coal India Recruitment) ही होगी।
अच्छी बात यह है कि इस तीन साल की अवधि में आपके ट्रेनिंग के समय को भी जोड़ा जाएगा। यानी ट्रेनिंग के साथ कुल तीन साल की सर्विस होते ही आप अगले ग्रेड के हकदार हो जाएंगे। यही नियम ई-टू से ई-थ्री ग्रेड के प्रमोशन पर भी सख्ती से लागू किया गया है।
माइनिंग कैडर में सर्टिफिकेट का बढ़ा बोझ
खदानों में काम करने वाले माइनिंग संवर्ग के लिए भी एक बड़ा अपडेट है। अब प्रमोशन की रेस में बने रहने के लिए ‘सेकेंड क्लास माइंस मैनेजर सर्टिफिकेट’ को अनिवार्य कर दिया गया है।
पहले यह शर्त ऊंचे पदों (E-3 से E-4) के लिए होती थी, लेकिन अब इसे निचले स्तर यानी ई-टू से ई-थ्री के प्रमोशन के लिए ही जरूरी कर दिया गया है। यह सर्टिफिकेट ओपनकास्ट और अंडरग्राउंड दोनों ही तरह की खदानों के लिए मान्य होगा। इसके अलावा, मेडिकल कैडर में भी ई-थ्री और ई-फोर ग्रेड की योग्यताओं में बड़े बदलाव किए गए हैं।
इंक्रीमेंट का नया फॉर्मूला और लागू होने की तारीख
वेतन वृद्धि यानी इंक्रीमेंट को लेकर भी अब कोई कंफ्यूजन नहीं रहेगा। नियमों के अनुसार, पहली वेतन वृद्धि एक साल की ट्रेनिंग पूरी होने के ठीक अगले महीने की पहली तारीख से मिलेगी।
इसके बाद, हर साल 1 अप्रैल को वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाएगा। कोल इंडिया ने यह साफ कर दिया है कि ये तमाम नए नियम पुरानी भर्तियों पर लागू नहीं होंगे। ये बदलाव केवल उन विज्ञापनों और भर्तियों पर प्रभावी होंगे जो 23 मार्च 2026 के बाद नोटिफाई की गई हैं।
