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Cnidosis: शीतपित्त या पित्ती, त्वचा पर मोटे-मोटे चकत्ते, ये है उपयुक्त घरेलू उपाय..

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Cnidosis

Cnidosis: पित्ती त्वचा का ऐसा रोग है, जो रक्त वाहिकाओं की प्रतिक्रिया से सम्बन्धित है। इसमें त्वचा पर मोटे-मोटे चकत्ते उभर आते हैं, जो सामान्य त्वचा से अधिक लाल या पीले होते हैं। इनमें खुजली होती है तथा ये चकत्ते कुछ समय तक दिखाई देते हैं।

एलर्जी (Cnidosis) करने वाले तत्व, व्यायाम या शारीरिक श्रम करने के तुरन्त बाद ही, जब शरीर गर्म होता है, ठंडे जल से स्नान करने ने पर भी पित्ती उछल जाती है। आंतों में कीड़ों के पाए जाने तथा ठंडी हवा लगाने से भी पित्ती की उत्तेजिता आमतौर पर देखी जाती हैं। ऐसे रोगों को जुकाम, खांसी, ब्रोंकाइटिस और पेट में गड़बड़ की शिकायतें भी रह सकती हैं। 

शीतपित्त– पित्ती का उपचार

अलसी (Cnidosis) का तेल दो भाग एक शीशी में डालकर ऊपर से कपूर (एक भाग) डालकर शीशी को कार्क से बन्द कर दें। 10-15 मिनट रख देने से दोनों मिलाकर एकरस हो जायंगे। इस तेल की मालिश शरीर पर करें। इससे पित्ती उछलना या एकदम हवा आदि लगने से शरीर में खारिश होना ठीक होती है।  नीम के पत्ते तब तक चबाते रहें जब तक कड़वे न लग जायें। पत्ते कड़वे नहीं लगते। 

इस रोग के लिए एक बहुत ही प्रचलित घरेलु औषधि हल्दी है। (Cnidosis) पानी के साथ हल्दी का पाउडर रगड़कर इसका पेष्ट बनाकर दो छोटे चम्मच की मात्रा में दिन में तीन बार रोगी को पिलाने से लाभ होता है।

 इस रोग की चिकित्सा के लिए लाल गेरू या गैरिक भी बहुत प्रचलित औषधि है। जहां तक हो सके, रोगी को नमक से रहित भोजन देना चाहिए। कड़वे स्वाद वाली सब्जियां जैसे करेला और कड़वी सहिजन इस रोग के लिए लाभदायक हैं। प्याज से लहसुन रोगी को पर्याप्त मात्रा में दिया जा सकता है। दहीं व अन्य खटै पदार्थो से परहेज रखना चाहिए।

Note: यह उपाय इंटरनेट के माध्यम से संकलित हैं कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श करके ही उपाय करें ।

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