छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत गरीब बच्चों के दाखिले में हो रही देरी और विसंगतियों पर बिलासपुर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार द्वारा पेश की गई अधूरी जानकारी पर गहरी नाराजगी जताई।
कोर्ट में जब सरकार की ओर से संयुक्त सचिव ने बताया कि 25 हजार बच्चों को प्रवेश दिया जा चुका है, तो चीफ जस्टिस ने दोटूक कहा कि केवल नंबर बताने से काम नहीं चलेगा। कोर्ट ने आदेश दिया है कि सरकार उन बच्चों की पूरी सूची पेश करे जिन्हें दाखिला मिला है और यह भी बताए कि किस बच्चे को किस स्कूल में जगह मिली है। अदालत ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि जब नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है, तो अब तक प्रवेश की प्रक्रिया अधूरी क्यों है?
सीटों का गणित और सरकारी दावों में बड़ा अंतर: 80 हजार से सीधे 21 हजार पर सिमटा आंकड़ा (Chief Justice Ramesh Sinha)
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए शपथ पत्र ने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। सरकार ने स्वीकार किया कि प्रदेश के 6,861 स्कूलों में RTE के लिए महज 21,698 सीटें ही उपलब्ध हैं, जबकि पहले चर्चा 80,000 सीटों की थी। आंकड़ों के अनुसार, कुल 38,439 आवेदन प्राप्त हुए थे,
जिनमें से 7,066 को खारिज कर दिया गया और 2,045 आवेदन अब भी पेंडिंग हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि कई जिलों में आवेदनों के सत्यापन (वेरिफिकेशन) की रफ्तार 10 प्रतिशत से भी कम है। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि जब हजारों गरीब बच्चे शिक्षा के लिए भटक रहे हैं, तो इतनी बड़ी संख्या में सीटें खाली क्यों रह गईं और गणना का आधार अचानक कैसे बदल गया?
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी, ‘RTE वाले सरकारी स्कूल जाएं’, छात्रा की शिकायत पर कोर्ट गंभीर (Chief Justice Ramesh Sinha)
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान निजी स्कूलों की दादागिरी का मुद्दा भी गूंजा। एक स्कूली छात्रा द्वारा दायर हस्तक्षेप याचिका में आरोप लगाया गया कि दुर्ग के सेंट जेवियर्स जैसे नामी स्कूल RTE के तहत आने वाले बच्चों को यह कहकर टाल देते हैं कि वे सरकारी स्कूल में जाकर पढ़ाई करें।
वहीं, श्री शंकरा विद्यालय भिलाई और बिलासपुर के नारायणा स्कूल से जुड़ी शिकायतों पर भी बहस हुई। सरकार ने बचाव में कहा कि स्कूलों की मनमानी पर नजर रखी जा रही है और दुर्ग में मिली 118 शिकायतों में से 77 का निपटारा कर दिया गया है। कोर्ट ने इन तर्कों को नाकाफी मानते हुए सरकार को अगली सुनवाई तक पूरी पारदर्शिता के साथ विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 20 अप्रैल को होगी।
