गरियाबंद। छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता (Biodiversity Research) में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। गरियाबंद के घने जंगलों में किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण में मकड़ियों की तीन दुर्लभ प्रजातियों (Chhattisgarh Spider Discovery) का दस्तावेजीकरण किया गया है। इस खोज की खास बात यह है कि इनमें से दो प्रजातियों का छत्तीसगढ़ में पहली बार वैज्ञानिक वितरण रिकॉर्ड दर्ज हुआ है, जबकि एक दुर्लभ प्रजाति के नर का राज्य से पहला प्रमाणिक रिकॉर्ड मिला है।
इस खोज से छत्तीसगढ़ के वन्यजीव और पर्यावरण अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि गरियाबंद के जंगलों में जैव विविधता का खजाना छिपा हुआ है और आने वाले समय में कई अन्य दुर्लभ प्रजातियों की जानकारी सामने आ सकती है।
गरियाबंद के जंगलों में मिला दुर्लभ प्रजातियों का प्रमाण
स्पाइडर डायवर्सिटी पर केंद्रित इस वैज्ञानिक अध्ययन (Spider Diversity Study) को डॉ. अविनाश आर. निचत, डॉ. केके हैरिस, जशवंत नायक, मानसी मजूमदार और राजनांदगांव के रिसर्च स्कॉलर हितेश कुमार वारते की संयुक्त टीम ने पूरा किया है।
अध्ययन के दौरान मकड़ियों की तीन दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि हुई है। इनमें जिया सुबरमाटा, हमातालिवा पेंटागोना और ब्रिटस सिग्यूलेटस शामिल हैं।
दो प्रजातियों का छत्तीसगढ़ में पहली बार रिकॉर्ड
वैज्ञानिक अध्ययन में जिया सुबरमाटा (Zia Subarmata) का छत्तीसगढ़ में पहला वैज्ञानिक वितरण रिकॉर्ड मिला है। इसी तरह हमातालिवा पेंटागोना (Hamataliwa Pentagona) प्रजाति को भी पहली बार प्रदेश के वन क्षेत्र में दर्ज किया गया है।
वहीं ब्रिटस सिग्यूलेटस (Brettus Cingulatus) प्रजाति के नर का राज्य से पहला वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण हुआ है। इससे पहले भारत और छत्तीसगढ़ में इस प्रजाति की केवल मादा का रिकॉर्ड उपलब्ध था।
जैव विविधता संरक्षण के लिए अहम खोज
शोधकर्ताओं के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग-130 से लगे गरियाबंद के वन क्षेत्र जैव विविधता (Biodiversity Conservation) के लिहाज से बेहद समृद्ध हैं। यहां मकड़ियों की कई अन्य अज्ञात और दुर्लभ प्रजातियां मिलने की संभावना है।
मकड़ियां पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये प्राकृतिक रूप से फसलों और जंगलों को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक कीटों की संख्या को नियंत्रित करती हैं। इसलिए इनका वैज्ञानिक अध्ययन पर्यावरण संरक्षण और वन प्रबंधन के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।
वन प्रबंधन और जलवायु अनुसंधान को मिलेगी मदद
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह के अध्ययन भविष्य में वन प्रबंधन (Forest Management) और जलवायु परिवर्तन से जुड़े अनुसंधानों के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करते हैं। दुर्लभ जीव-जंतुओं की पहचान और उनका वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार होने से उनके संरक्षण की योजनाएं बनाने में भी सहायता मिलती है।
छत्तीसगढ़ की जैव विविधता को मिली नई पहचान
गरियाबंद के जंगलों से मिली यह खोज (Gariband Forest Discovery) प्रदेश की प्राकृतिक संपदा और जैव विविधता की समृद्धि को दर्शाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाले समय में राज्य के अन्य वन क्षेत्रों में भी ऐसे सर्वेक्षण किए जाने से कई नई प्रजातियों की जानकारी सामने आ सकती है।
शोध के मुख्य बिंदु
गरियाबंद के जंगलों में मकड़ियों की तीन दुर्लभ प्रजातियों का नया वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण।
दो प्रजातियों का छत्तीसगढ़ में पहली बार आधिकारिक वितरण रिकॉर्ड।
ब्रिटस सिग्यूलेटस के नर का राज्य से पहला प्रमाणिक रिकॉर्ड।
खोज से छत्तीसगढ़ के पर्यावरण और जैव विविधता अनुसंधान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी।
