क्या आपने कभी सोचा है कि आपके खून-पसीने की कमाई से टैक्स के रूप में जो चमचमाती सड़कें (Chhattisgarh PWD) बनती हैं, वे बनते ही दोबारा क्यों खोद दी जाती हैं? कभी नगर निगम पानी की पाइपलाइन डालने के लिए सड़क का सीना चीर देता है, तो कभी बिजली विभाग अंडरग्राउंड केबल बिछाने के लिए नई नवेली सड़क को मलबे में तब्दील कर देता है। जनता परेशान, धूल-धूसरित रास्ते और सरकारी खजाने की सरेआम बर्बादी! लेकिन अब छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और उसके आसपास के इलाकों में यह तमाशा बंद होने जा रहा है। सरकार ने सीधे तौर पर उन अफसरों की जवाबदेही तय करने का मन बना लिया है जो एयरकंडीशंड कमरों में बैठकर कागजों पर विकास की लकीरें खींचते हैं। अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, क्योंकि अब सीधे तौर पर विभागीय कसावट और जनता की सहूलियत को केंद्र में रखकर एक बड़े बदलाव की जमीन तैयार की जा चुकी है।
इस बार का तेवर प्रशासनिक नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जनहित से जुड़ा है। लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने नवा रायपुर के पीडब्लूडी मुख्यालय निर्माण भवन में रायपुर परिक्षेत्र के दोनों मंडलों की जब समीक्षा बैठक ली, तो उनके तेवर आम दिनों जैसे ढीले-ढाले नहीं थे। उन्होंने साफ शब्दों में अफसरों को चेतावनी दी कि अब ‘खोदो और बनाओ’ का यह अंतहीन खेल बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए निर्देश दिए कि नगरीय निकाय से तालमेल बैठाकर शहर के बीच बनने वाली सड़कों के निर्माण के समय ही नाली, अंडरग्राउंड केबल और पाइपलाइन का पक्का इंतजाम किया जाए। सचिव का यह कड़ा रुख सीधे तौर पर उन ठेकेदारों और इंजीनियरों के गठजोड़ पर करारा प्रहार है जो एक ही सड़क को बार-बार बनाकर सरकारी धन का दुरुपयोग करते हैं।
बरसात सिर पर है, गड्ढों का हिसाब कौन देगा? : Chhattisgarh PWD
मानसून की आहट छत्तीसगढ़ में हो चुकी है। पहली ही बारिश में जब राजधानी की सड़कें तालाब बनने लगती हैं और गड्ढों के कारण हादसे होते हैं, तो सवाल सीधे सरकार और उसके सिस्टम पर उठते हैं। इसी मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए विभागीय सचिव ने सख्त हिदायत दी है कि बरसात के शुरू होने से पहले ही हर हाल में सभी सड़कों की मरम्मत कर उन्हें पूरी तरह से गड्डामुक्त किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वे सिर्फ दफ्तरों में न बैठें, बल्कि अपने-अपने कार्यक्षेत्र की सड़कों की वास्तविक स्थिति की पल-पल की जानकारी रखें।
जनता को राहत देने के लिए इस बार एक बेहद कड़ा नियम लागू किया जा रहा है। जिन सड़कों की ‘परफार्मेंस गारंटी’ अभी बची हुई है और उनमें अगर कहीं भी खराबी या गड्ढे नजर आते हैं, तो संबंधित ठेकेदारों की खैर नहीं होगी। विभाग उन ठेकेदारों से तत्काल बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के मरम्मत का काम कराएगा। अगर ठेकेदार आनाकानी करते हैं, तो उन पर पेनाल्टी लगाने और ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी। सरकार का यह कदम सीधे तौर पर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता (PWD Infrastructure Development) को सुधारने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने वाला है, जिससे ठेकेदारों की मनमानी पर पूरी तरह से लगाम कसेगी।
फाइलों में बंद नहीं रहेंगी योजनाएं, तय हुई डेडलाइन
सरकारी विभागों में अमूमन योजनाएं बनती हैं, स्वीकृत होती हैं और फिर महीनों तक लालफीताशाही की भेंट चढ़कर फाइलों में धूल खाती रहती हैं। लेकिन इस बार का एजेंडा बिल्कुल साफ और आक्रामक है। बैठक में सचिव ने चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 और पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान स्वीकृत हुए सभी कार्यों की एक स्पष्ट प्राथमिकता सूची तैयार करने को कहा है। इसके लिए उन्होंने 10 जून तक का समय दिया है, यानी महज कुछ ही दिनों के भीतर अफसरों को यह बताना होगा कि कौन सा काम जनता के लिए कितना जरूरी है।
इतना ही नहीं, कागजी घोड़ों को दौड़ाने के बजाय जमीनी स्तर पर फंड का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए 31 जुलाई तक सभी कार्यों के प्राक्कलन (एस्टीमेट) भेजने का अल्टीमेटम दे दिया गया है। सचिव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी खजाने की एक-एक पाई का सदुपयोग होना चाहिए। किसी भी निर्माण कार्य को केवल बजट खपाने के लिए शुरू नहीं किया जाएगा। विभाग का मुख्य फोकस अब कार्यों की पूर्ण उपयोगिता और टिकाऊपन (PWD Infrastructure Development) सुनिश्चित करने पर होगा। इसका सीधा मतलब यह है कि जो भी सड़क या भवन बनेगा, वह सालों-साल बिना किसी खराबी के जनता की सेवा में खड़ा रहना चाहिए, न कि पहली ही बारिश में उसकी गिट्टियां उखड़ने लगें।
मंगलवार को दफ्तर में ही रहेंगे ‘साहब’, गायब मिले तो कार्रवाई तय
अक्सर आम नागरिकों की यह सबसे बड़ी शिकायत होती है कि वे अपनी समस्याओं को लेकर जब लोक निर्माण विभाग के दफ्तरों के चक्कर काटते हैं, तो अनुविभागीय अधिकारी से लेकर बड़े इंजीनियर तक ‘फील्ड विजिट’ या ‘मीटिंग’ का बहाना बनाकर गायब मिलते हैं। जनता की इस तकलीफ को समझते हुए अब एक बेहद कड़ा और संवेदनशील फैसला लिया गया है। अब अनुविभागीय अधिकारियों (SDO) से लेकर प्रमुख अभियंता तक के सभी स्तर के अधिकारियों को प्रत्येक मंगलवार को अनिवार्य रूप से दिनभर अपने मुख्यालय में ही मौजूद रहना होगा।
मंगलवार का यह दिन पूरी तरह से जनता और प्रशासनिक कसावट के नाम रहेगा। इस दिन कोई भी अधिकारी फील्ड के नाम पर दफ्तर से नदारद नहीं रह सकेगा। यदि कोई अधिकारी इस आदेश का उल्लंघन करता पाया गया, तो उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटकना (Chhattisgarh PWD) तय है। रायपुर और नवा रायपुर में विभागीय कार्यों को सुगम बनाने तथा प्रशासनिक नियंत्रण को और अधिक मजबूत करने के लिए रायपुर मंडल क्रमांक-1 के अंतर्गत आने वाले चारों संभागों का पुनर्गठन करने का भी फैसला लिया गया है। इस पुनर्गठन (PWD Infrastructure Development) के माध्यम से कार्यक्षेत्रों का नए सिरे से वैज्ञानिक विभाजन किया जाएगा, जिससे फाइलों का निपटारा तेजी से हो सके और जनता की शिकायतों को दूर करने में कोई देरी न हो।
अगले 10 साल की प्लानिंग: अब रेंगते हुए ट्रैफिक से मिलेगी मुक्ति
क्या हमारे शहर वाकई भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हैं? आज हम जो सड़क छह लेन की बनाते हैं, दो साल बाद वहां गाड़ियों की कतारें रेंगती नजर आती हैं। अफसरों की इसी अदूरदर्शिता को दूर करने के लिए बैठक में एक बेहद दूरगामी निर्देश दिया गया है। सचिव मुकेश कुमार बंसल ने कहा कि अब जब भी किसी नई सड़क का प्रस्ताव तैयार किया जाए, तो उसमें केवल आज की स्थिति न देखी जाए। इंजीनियरों को अगले 10 वर्षों के संभावित ट्रैफिक, तेजी से बढ़ती आबादी की जरूरत और उस इलाके के आसपास आने वाली संभावित विकास परियोजनाओं को ध्यान में रखकर ही डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करनी होगी।
इसके साथ ही, रायपुर परिक्षेत्र के अंतर्गत चल रहे भवन और सड़क निर्माण के कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सभी प्रमुख सड़क खंडों पर फ्लाई-ओवर्स की एक समग्र और एकीकृत योजना के साथ काम करने के लिए कहा गया है। अब टुकड़ों-टुकड़ों में काम नहीं होगा। अगर किसी सड़क के चौड़ीकरण की परियोजना चल रही है और उसके बीच में कोई पुल-पुलिया या राष्ट्रीय राजमार्ग का कोई हिस्सा आ रहा है, तो उसके भी चौड़ीकरण की कार्ययोजना को मुख्य परियोजना के साथ ही शामिल करना होगा। सड़क के इस आधुनिक विकास (PWD Infrastructure Development) से न केवल हादसों में कमी आएगी, बल्कि आने वाले दशकों में रायपुर को जाम की गंभीर समस्या से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।
सरकारी भवनों में दिव्यांगों के हक का रखा जाएगा ख्याल
अक्सर देखा गया है कि आलीशान सरकारी इमारतें तो खड़ी कर दी जाती हैं, लेकिन समाज के एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्से – यानी दिव्यांगजनों और बुजुर्गों की सहूलियत को पूरी तरह भुला दिया जाता है। इस बार इस मानवीय पहलू पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने कड़े निर्देश दिए हैं कि जितने भी नए शासकीय भवनों का निर्माण हो रहा है, उनमें अच्छी गुणवत्ता की निर्माण सामग्री, जैसे खिड़की, दरवाजे, टाइल्स, उत्कृष्ट दर्जे का पेंट-पुट्टी, सेनिटरी फिटिंग और इलेक्ट्रिक फिटिंग का उपयोग तो किया ही जाए, साथ ही अनिवार्य रूप से दिव्यांगों के लिए रैंप और सपोर्ट रेलिंग का प्रावधान भी प्रोजेक्ट के मूल डिजाइन में शामिल हो।
इतना ही नहीं, केवल भवन का ढांचा खड़ा कर देना ही जिम्मेदारी नहीं होगी। भवन के चारों तरफ का जो परिसर है, वहां तक पहुंचने के लिए समुचित पहुंच मार्ग, चारों तरफ हरियाली, बेहतरीन साफ-सफाई और एक मजबूत बाउंड्री-वॉल की पूरी कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए। भवनों के इस समग्र परिसर विकास (PWD Infrastructure Development) का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी संपत्तियों की ज्यादा से ज्यादा उपयोगिता हो सके और वहां आने वाले हर एक नागरिक को एक सुखद और सुलभ माहौल मिल सके।
चमचमाती सड़कों पर अनाधिकृत विज्ञापनों का कचरा साफ होगा
शहर की खूबसूरती सिर्फ अच्छी सड़कों से नहीं, बल्कि उनकी साफ-सफाई से भी तय होती है। अमूमन देखा जाता है कि करोड़ों की लागत से डिवाइडर और सड़कें तो बन जाती हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में उन पर झाड़ियां और गाजरघास उग आती हैं, जो हादसों को न्यौता देती हैं। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिए गए हैं कि शहर की सभी सड़कों के किनारों और डिवाइडर्स पर जमी झाड़ियों, घास-फूस और कचरों को हटाकर नियमित रूप से साफ-सफाई रखी जाए। इसके लिए लोक निर्माण विभाग रायपुर नगर निगम के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान चलाएगा, जिसके तहत सड़कों के दोनों किनारों की नालियों की सघन सफाई कराई जाएगी ताकि आगामी मानसूनी बारिश के दौरान सड़कों पर जलभराव (वॉटर लॉगिंग) की नौबत न आए।
इसी के साथ, सरकारी संपत्तियों को बदरंग करने वाले भू-माफियाओं, कोचिंग सेंटरों और स्थानीय विज्ञापनदाताओं पर भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। लोक निर्माण विभाग की संपत्तियों, बिजली के पोल्स और डिवाइडर्स पर बिना अनुमति के अनाधिकृत विज्ञापन, बैनर, पोस्टर, होर्डिंग और फ्लेक्स लगाने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा। सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऐसे लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ तत्काल ‘संपत्ति विरूपण अधिनियम’ के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज कराई जाए। विभाग की संपत्ति की सुरक्षा (PWD Infrastructure Development) और शहर की सुंदरता को बनाए रखना अब अफसरों की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।
जवाबदेही और सक्रियता से बदलेगी विभाग की छवि
इस पूरी समीक्षा बैठक का लब्बोलुआब यह है कि अब सरकार जनता के प्रति पूरी तरह जवाबदेह बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। श्री बंसल ने दोटूक शब्दों में कहा कि निर्माण कार्यों में सर्वोत्तम गुणवत्ता और समय-सीमा के भीतर काम को पूरा करना इस सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता (Chhattisgarh PWD) है। उन्होंने सभी छोटे-बड़े अधिकारियों को नसीहत दी कि वे अपने सुव्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध कार्यों के जरिए आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच विभाग की एक नई और ईमानदार छवि स्थापित करें।
अब वो दौर चला गया जब ठेकेदार अपनी मर्जी से काम की गति तय करते थे। अब हर एक अधिकारी को अपनी पूरी जवाबदेही, सक्रियता और गंभीरता के साथ मैदान पर उतरना होगा। इस महत्वपूर्ण बैठक में रायपुर परिक्षेत्र के दोनों मंडलों के अधीक्षण अभियंता, सभी संभागों के कार्यपालन अभियंता तथा मैदानी स्तर के अनुविभागीय अधिकारी भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे, जिन्हें उनके कार्यक्षेत्र के लिए कड़े टास्क सौंप दिए गए हैं। देखना दिलचस्प होगा कि इस प्रशासनिक कड़ाई के बाद रायपुर की सड़कों और अधोसंरचना निर्माण (PWD Infrastructure Development) की सूरत कितनी जल्दी और कितनी शानदार बदलती है। जनता की नजरें अब सीधे तौर पर सिस्टम की इस नई कार्यशैली और आने वाले परिणामों पर टिकी हुई हैं।
