रायपुर और कानूनी हलकों में गुरुवार को छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मामले की खूब (Chhattisgarh Liquor Scam) चर्चा रही। अदालत के फैसले के बाद लोगों के बीच यह सवाल उठता रहा कि आखिर किन आधारों पर पूर्व आबकारी आयुक्त को राहत मिली। मामले ने एक बार फिर लंबे समय से चल रही जांच और न्यायिक प्रक्रिया को सुर्खियों में ला दिया।
अदालती फैसले की जानकारी सामने आते ही कानूनी विशेषज्ञों और आम लोगों के बीच अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। पूरे घटनाक्रम में अदालत की उस टिप्पणी पर सबसे ज्यादा ध्यान गया, जिसमें कहा गया कि केवल आपराधिक इतिहास को जमानत से इनकार करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
अदालत ने जमानत के उद्देश्य पर रखी बात Chhattisgarh Liquor Scam
इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जमानत का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि आरोपी ट्रायल के दौरान अदालत में उपस्थित रहे। अदालत ने माना कि राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि पूर्व आबकारी आयुक्त और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी निरंजन दास न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं, गवाहों पर दबाव बना सकते हैं या सबूतों से छेड़छाड़ करेंगे। इसी आधार पर अदालत ने जमानत मंजूर कर दी।
दो हजार एक सौ इकसठ करोड़ रुपये के कथित मामले से जुड़ा आरोप
अभियोजन के अनुसार निरंजन दास पर आरोप है कि आबकारी आयुक्त रहते हुए उन्होंने ऐसी आबकारी नीति और निविदा प्रक्रिया तैयार की, जिससे नोएडा की एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ मिला। आरोप यह भी है कि कथित नकली होलोग्राम के जरिए शराब घोटाले को अंजाम दिया गया। इसी मामले में छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों में अलग अलग प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उत्तर प्रदेश में मामला इसलिए दर्ज हुआ क्योंकि होलोग्राम की छपाई नोएडा में होने का आरोप है।
पहले भी मिल चुकी है राहत
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य भी रखा गया कि छत्तीसगढ़ से जुड़े मुख्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय मई 2026 में निरंजन दास को पहले ही जमानत (Chhattisgarh Liquor Scam) दे चुका है। अदालत ने इस पहलू को भी रिकॉर्ड में लिया।
लंबी सुनवाई की संभावना पर भी विचार
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि कथित आर्थिक नुकसान छत्तीसगढ़ में हुआ है। वहीं उत्तर प्रदेश में जांच पूरी की जा चुकी है और इस मामले में आरोप पत्र भी दाखिल हो चुका है, जिसमें 22 गवाहों का उल्लेख है। अदालत ने माना कि मुकदमे के पूरा होने में समय लग सकता है। इन परिस्थितियों को देखते हुए निरंजन दास को जमानत देने का फैसला सुनाया गया।
