सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला (Chhattisgarh High Court) सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी कर्मचारी को वर्षों तक बिना पदोन्नति के एक ही पद पर बनाए रखना उचित नहीं है। यदि किसी भर्ती नियम में पदोन्नति का कोई प्रावधान ही नहीं है और उससे कर्मचारियों का स्थायी ठहराव हो रहा है, तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन माना जाएगा।
हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था नहीं रखनी चाहिए, जिसमें किसी एक कैडर के कर्मचारियों के लिए आगे बढ़ने का कोई अवसर ही न हो। अदालत ने इसे मनमाना और असमान व्यवहार करार दिया।
नेत्र सहायकों की याचिका पर सुनाया फैसला Chhattisgarh High Court
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने नेत्र सहायकों द्वारा दायर रिट याचिका (Chhattisgarh High Court ) पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता सीधी भर्ती के माध्यम से नियुक्त हुए थे और दस वर्ष से अधिक समय से सेवा दे रहे थे।
उन्होंने अदालत को बताया कि छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के वर्ष 2013 के भर्ती नियमों में नेत्र सहायक पद के लिए पदोन्नति का कोई प्रावधान नहीं है। इसके कारण उनका पूरा सेवा जीवन एक ही पद पर बीत रहा है।
सरकार ने रखा अपना पक्ष
राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि कर्मचारियों को पदोन्नति का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। भर्ती नियम बनाना और पदोन्नति के पद सृजित करना सरकार के नीतिगत अधिकार (Chhattisgarh High Court) क्षेत्र का विषय है।
अदालत ने बताया क्यों जरूरी है पदोन्नति का अवसर Chhattisgarh High Court
हाईकोर्ट ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में नीतिगत फैसलों में न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करता, लेकिन यदि किसी नीति के कारण किसी विशेष वर्ग के कर्मचारियों के लिए पदोन्नति का रास्ता पूरी तरह बंद हो जाए और उनका स्थायी ठहराव हो जाए, तो न्यायिक समीक्षा आवश्यक हो जाती है।
अदालत ने पाया कि राज्य यह स्पष्ट नहीं कर सका कि केवल नेत्र सहायकों को ही पदोन्नति के अवसर से वंचित क्यों रखा गया, जबकि समान प्रकृति के अन्य तकनीकी कैडरों के लिए पदोन्नति की व्यवस्था मौजूद है।
दूसरे राज्यों का भी किया उल्लेख
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी माना कि देश के कई राज्यों में नेत्र सहायकों के लिए पदोन्नति की व्यवस्था पहले से लागू है। इससे यह स्पष्ट होता है कि ऐसा पदानुक्रम बनाना प्रशासनिक रूप से संभव है।
भर्ती नियमों को बताया मनमाना
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी को केवल इसलिए पूरी सेवा अवधि तक एक ही पद पर नहीं रखा जा सकता क्योंकि संबंधित नियमों में पदोन्नति का प्रावधान नहीं बनाया गया है।
अदालत ने माना कि छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के वर्ष 2013 के भर्ती नियम, जहां तक नेत्र सहायकों के लिए पदोन्नति का प्रावधान नहीं करते, वे मनमाने हैं और संविधान के अनुच्छेद 14 तथा 16 का उल्लंघन (Chhattisgarh High Court) करते हैं।
सरकार को नए नियम बनाने के निर्देश
फैसले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं की शिकायत पर विचार करे और नेत्र सहायकों के लिए उपयुक्त पदोन्नति व्यवस्था विकसित करने हेतु आवश्यक नियम बनाने की प्रक्रिया शुरू करे।
