Chhattisgarh Electricity Crisis : भीषण गर्मी में हांफने लगे सीएसईबी के पावर प्लांट, कोरबा में राखड़ बांध फूटने से दो यूनिट बंद

छत्तीसगढ़ में पड़ रही भीषण गर्मी ने आम जनजीवन के साथ-साथ प्रदेश की बिजली व्यवस्था (Chhattisgarh Electricity Crisis) को भी बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है। वर्तमान में राज्य में बिजली की मांग अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, लेकिन बिजली उत्पादन में आई भारी गिरावट ने छत्तीसगढ़ में बिजली संकट की स्थिति उत्पन्न कर दी है। कोरबा स्थित हसदेव ताप विद्युत संयंत्र (HTPP) में झाबू राखड़ बांध के अचानक फूटने से व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिसके कारण दो महत्वपूर्ण इकाइयों को बंद करना पड़ा है।

मांग 7000 मेगावाट के पार

प्रदेश में इस समय बिजली (Chhattisgarh Electricity Crisis) की खपत 7000 मेगावाट के पार पहुंच चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 200 मेगावाट अधिक है। इसके विपरीत, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी का अपना उत्पादन घटकर मात्र 2000 से 2050 मेगावाट के आसपास रह गया है। मांग और आपूर्ति के बीच का यह बड़ा अंतर गहराते संकट की ओर संकेत कर रहा है। यद्यपि राज्य के संयंत्रों की कुल स्थापित क्षमता 2960 मेगावाट है, लेकिन विभिन्न तकनीकी कारणों और दुर्घटनाओं की वजह से वर्तमान में केवल 1500 से 1600 मेगावाट बिजली ही पैदा हो पा रही है।

कोरबा हादसे से उत्पादन पर सीधा प्रहार

कोरबा के एचटीपीपी (HTPP) में झाबू राखड़ बांध फूटने की घटना ने उत्पादन पर सीधा प्रहार किया है। राख निकासी की व्यवस्था बाधित होने के कारण 210-210 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट-3 और यूनिट-4 को तत्काल प्रभाव से बंद करना पड़ा। इसके अलावा मड़वा स्थित 500 मेगावाट का संयंत्र भी तकनीकी खराबी के चलते ठप पड़ा है। शेष चालू इकाइयां भी अपनी पूर्ण क्षमता पर कार्य नहीं कर पा रही हैं; यूनिट-1 से केवल 110 मेगावाट और यूनिट-2 से 130 मेगावाट उत्पादन ही मिल पा रहा है।

सेंट्रल पुल पर बढ़ी निर्भरता (Chhattisgarh Electricity Crisis)

स्वयं के उत्पादन में भारी कमी आने के कारण छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh Electricity Crisis) को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्रीय सेक्टर (सेंट्रल पुल) के भरोसे रहना पड़ रहा है। वर्तमान में प्रदेश की खपत को नियंत्रित रखने के लिए रोजाना 4800 से 5000 मेगावाट बिजली बाहर से खरीदी जा रही है। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि अनुबंधित बिजली मिलने से सप्लाई सुचारू है, लेकिन बाजार से बिजली खरीदना कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव डाल रहा है।

मरम्मत और वैकल्पिक व्यवस्था

राख की समस्या से निपटने के लिए प्रबंधन ने अब राख को झाबू बांध के बजाय डिंडोलभाठा राखड़ बांध की ओर भेजना शुरू कर दिया है। क्षतिग्रस्त झाबू बांध की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर जारी है, जिसमें तटबंधों को मजबूती प्रदान करना और रिसाव रोकना मुख्य प्राथमिकता है। प्रशासन का प्रयास है कि अगले दो दिनों में स्थिति को सामान्य कर लिया जाए।

विशेषज्ञों की टीम करेगी जांच

राखड़ बांध फूटने की इस गंभीर घटना की तकनीकी जांच (Chhattisgarh Electricity Crisis) के लिए जल्द ही विशेषज्ञों की एक टीम एचटीपीपी पहुंचेगी। यह टीम न केवल बांध टूटने के कारणों का विश्लेषण करेगी, बल्कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं से बचने के लिए सुधारात्मक सुझाव और स्थानीय कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण भी देगी। मुख्य अभियंता एचके सिंह ने आश्वासन दिया है कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत राख को दूसरे बांध में भेजा जा रहा है और जल्द ही उत्पादन इकाइयों को फिर से चालू कर स्थिति को नियंत्रित कर लिया जाएगा।

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