छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले किसानों के लिए इस साल अपनी ही उपज बेचना किसी अग्निपरीक्षा से कम (Chhattisgarh Dhan Kharidi 2026) नहीं रह गया है। प्रदेश में धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू हुए करीब तीन हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन सरकारी समितियों और ऑनलाइन टोकन व्यवस्था ने किसानों के पसीने छुड़ा दिए हैं।
हालात ये हैं कि ‘टोकन तुंहर हाथ’ ऐप पर जैसे ही सुबह स्लॉट खुलता है, महज 120 से 180 सेकंड (2 से 3 मिनट) के भीतर सारे टोकन गायब हो जाते हैं। 27 लाख 30 हजार से ज्यादा पंजीकृत किसानों के बीच मची इस अफरा-तफरी ने सरकार के प्रबंधकीय दावों की पोल खोल दी है।
शादी रुकी, घर का काम अटका, किसानों की सिसकी (Chhattisgarh Dhan Kharidi 2026)
राजधानी के सांकरा गांव के किसान खोरबहारा राम साहू की व्यथा अकेले उनकी नहीं है। बेटे की शादी सिर पर है, लेकिन धान नहीं बिक पाने के कारण हाथ खाली हैं। वहीं दुर्ग के कई किसानों का कहना है कि वे सुबह 8:05 बजे ऐप खोलते हैं, तो स्क्रीन पर ‘स्लॉट फुल’ का बोर्ड नजर आता है।
आंगन में धान की बोरियां रखी हैं, जो न केवल मौसम की मार झेल रही हैं बल्कि किसानों की आर्थिक चिंताएं भी बढ़ा रही हैं। किसानों का आरोप है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार खरीदी की डेली लिमिट 15 से 25 प्रतिशत तक घटा दी गई है, जिससे संकट और गहरा गया है।
आंकड़े दे रहे हैं खतरे की दस्तक
अगर आंकड़ों के आईने में देखें, तो 15 नवंबर से शुरू हुई इस प्रक्रिया में 5 दिसंबर तक की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
कुल पंजीकृत किसान: 27.30 लाख
अब तक धान बेचने वाले: केवल 4.39 लाख
शेष किसान: करीब 23 लाख
दैनिक औसत खरीदी, लगभग 21,972 किसान
31 जनवरी की अंतिम तिथि तक सभी किसानों का धान खरीदने के लिए मार्कफेड को अब अपनी रफ्तार दोगुनी करनी होगी। जानकारों का कहना है कि अगर रोजाना 46 हजार से ज्यादा किसानों से धान नहीं खरीदा गया, तो निर्धारित समय सीमा में लक्ष्य पूरा करना नामुमकिन होगा।
व्यवस्था की खामियों के बीच आक्रोश और आरोप
इस लचर व्यवस्था ने किसानों के सब्र का बांध तोड़ दिया (Chhattisgarh Dhan Kharidi 2026) है। महासमुंद में टोकन न मिलने से हताश एक किसान द्वारा आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश ने शासन-प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। वहीं, जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की खबरें भी डराने वाली हैं।
बेरला ब्लॉक की कुसमी सोसायटी में तो किसानों ने समिति प्रबंधक पर टोकन के बदले 1000 से 4000 रुपये तक की अवैध वसूली का आरोप लगाकर घेराव कर दिया। दुर्ग के कोडिया और पाटन के फुंडा गांव में भी किसान सड़कों पर उतरकर पर्याप्त टोकन की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन का पक्ष, राहत की कोशिश या सिर्फ आश्वासन?
बढ़ते दबाव के बीच राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष संदीप शर्मा ने स्वीकार किया है कि लिमिट कम होने की शिकायतें उन तक पहुँची हैं और वे सरकार से इस पर चर्चा करेंगे। दूसरी ओर, मार्कफेड के प्रबंध संचालक जितेंद्र शुक्ला ने कुछ तकनीकी राहत देने की बात कही है। अब टोकन की वैधता 10 दिन से बढ़ाकर 20 दिन कर दी गई है। साथ ही कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि जहाँ जरूरत हो, वहां खरीदी लिमिट बढ़ाई जाए।
जटिल नियम और सुस्त उठाव
किसानों की परेशानी सिर्फ ऐप तक सीमित नहीं (Chhattisgarh Dhan Kharidi 2026) है। नियम इतने सख्त हैं कि सीमांत कृषक को केवल एक और लघु कृषक को अधिकतम दो टोकन की अनुमति है। इसके अलावा, समितियों से धान का उठाव (lifting) धीमा होने के कारण केंद्रों पर जगह की कमी हो गई है,
जिससे नई खरीदी की रफ्तार और सुस्त पड़ गई है। अब देखना होगा कि क्या सरकार समय रहते नियमों में ढील देती है या किसानों का यह ‘त्राहिमाम’ आने वाले दिनों में किसी बड़े आंदोलन की शक्ल अख्तियार करेगा।
