छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में बुधवार को जंबूरी आयोजन को लेकर सियासी पारा अचानक (Chhattisgarh Assembly Budget Session) चढ़ गया। प्रश्नकाल शुरू होते ही कांग्रेस विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने बालोद जिले में हुए आयोजन में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया और विधानसभा की समिति से जांच कराने की मांग कर दी।
मामला तूल पकड़ता गया, लेकिन स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए जांच कराने से साफ इनकार कर दिया। मंत्री के इस रुख से नाराज विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर विरोध दर्ज कराया।
प्रश्नकाल में उठा टेंडर और प्रक्रिया का मुद्दा
कांग्रेस विधायक ने सवाल उठाया कि जंबूरी आयोजन से जुड़े टेंडर की प्रक्रिया कब और किसके निर्देश पर पूरी की गई। उन्होंने यह भी पूछा कि मंत्री की नियुक्ति से पहले टेंडर जारी होने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी बनती है।
विधायक ने आरोप लगाया कि पहले 10 दिसंबर को टेंडर निकाला गया, जिसे बाद में निरस्त कर 23 दिसंबर को दोबारा जारी किया गया। साथ ही आयोजन से जुड़े बिंदुओं में भी कटौती किए जाने को लेकर सवाल खड़े किए गए।
मंत्री का जवाब – “प्रक्रिया नहीं रुकती”
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने जवाब देते हुए कहा कि शासन की प्रक्रियाएं किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं होतीं और वे लगातार चलती रहती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि टेंडर प्रक्रिया प्रशासनिक स्तर पर कलेक्टर के माध्यम से पूरी की गई थी। मंत्री ने यह भी कहा कि जिस समय आयोजन की तैयारी चल रही थी, उस दौरान संबंधित अधिकारियों और नेशनल स्तर के प्रतिनिधियों ने स्थल निरीक्षण और बैठकें कर ली थीं।
सदन में बढ़ा तनाव, सत्ता-विपक्ष में तीखी नोकझोंक
मामले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला की टिप्पणी के बाद माहौल और गरमा गया, जिससे सदन में कुछ देर के लिए हंगामे जैसी स्थिति (Chhattisgarh Assembly Budget Session) बन गई। विपक्ष लगातार यह मांग करता रहा कि टेंडर से पहले काम शुरू होने और प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच कराई जाए, लेकिन मंत्री अपने जवाब पर कायम रहे।
जांच से इनकार पर विपक्ष का वॉकआउट
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मंत्री के जवाब को असंतोषजनक बताते हुए कहा कि सरकार सवालों से बच रही है। उन्होंने कहा कि जब स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा, तो विपक्ष के पास सदन से बाहर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सामूहिक रूप से वॉकआउट कर दिया, जिससे सदन की कार्यवाही का माहौल पूरी तरह राजनीतिक टकराव में बदल गया।
अब आगे क्या, सियासत या सच्चाई?
जंबूरी आयोजन का यह मुद्दा अब सिर्फ प्रश्नकाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है। एक ओर सरकार आरोपों को निराधार (Chhattisgarh Assembly Budget Session) बता रही है, वहीं विपक्ष जांच की मांग पर अड़ा हुआ है-ऐसे में यह देखना अहम होगा कि यह मामला आगे किस दिशा में जाता है।
