Chhattisgarh Assembly Budget Session : अमानक चावल के मुद्दे पर विधानसभा में घमासान, मंत्री के जवाब से नाराज विपक्ष ने किया वॉकआउट

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के 11वें दिन अमानक चावल का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा और इस पर सदन में तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष ने खाद्य मंत्री दयालदास बघेल को घेरते हुए आरोप (Chhattisgarh Assembly Budget Session) लगाया कि मामले में गंभीर गड़बड़ी हुई है और अब तक दोषी अधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। विपक्ष ने इस मामले की जांच कराने के साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की।

सदन में विपक्षी सदस्यों ने कहा कि राशन व्यवस्था से जुड़ा यह मामला बेहद संवेदनशील है, क्योंकि इसका सीधा असर आम लोगों, खासकर गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ता है। उनका कहना था कि अमानक चावल की आपूर्ति केवल लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल है। विपक्ष ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा कि शिकायतों के बाद अब तक क्या कार्रवाई हुई, किन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।

खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि सरकार पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है और जहां-जहां शिकायतें सामने आई हैं, वहां आवश्यक जानकारी जुटाई (Chhattisgarh Assembly Budget Session) जा रही है। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर प्रक्रिया जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि मंत्री का जवाब विपक्ष को संतोषजनक नहीं लगा। विपक्ष ने कहा कि सदन को सामान्य आश्वासन नहीं, बल्कि साफ और विस्तृत जानकारी दी जानी चाहिए थी।

मामले पर बहस के दौरान सदन का माहौल लगातार गर्म बना रहा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार मामले की गंभीरता के अनुरूप जवाब देने से बच रही है और दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई को लेकर स्पष्ट रुख नहीं अपना रही। विपक्ष का कहना था कि यदि सरकार वास्तव में गंभीर है, तो उसे जांच और एफआईआर पर साफ घोषणा करनी चाहिए। इसी बात को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

काफी देर तक चले हंगामे और बहस के बाद विपक्ष ने खाद्य मंत्री के जवाब को अधूरा और असंतोषजनक बताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष के इस कदम के बाद अमानक चावल का मुद्दा राजनीतिक रूप से और अधिक गरमा (Chhattisgarh Assembly Budget Session) गया है। बजट सत्र के बीच उठे इस विवाद ने सरकार की जवाबदेही, खाद्य आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इस पूरे मामले में आगे क्या ठोस कदम उठाती है।

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