CG Naxal Policy : अब जेल में बंद माओवादियों को भी मुख्यधारा में लाने की तैयारी, सरकार की नई रणनीति तैयार

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान अब एक नए चरण में प्रवेश करता नजर आ रहा है। सक्रिय माओवादियों के सरेंडर और पुनर्वास के बाद अब सरकार ने जेलों में बंद नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में काम शुरू किया है। इस नई पहल के तहत ऐसे बंदियों को भी पुनर्वास प्रक्रिया में शामिल करने की योजना तैयार की जा रही है, जो छोटे-मोटे मामलों में जेल में हैं।

सरकार का मानना है कि केवल जंगलों में सक्रिय माओवादियों को मुख्यधारा में लाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन लोगों को भी अवसर देना जरूरी है, जो पहले ही कानून के दायरे में आ चुके हैं और अब सामान्य जीवन जीना चाहते हैं। इसी सोच के साथ एक नई रणनीति पर काम किया जा रहा है, जिसमें जेलों में बंद माओवादियों को चरणबद्ध तरीके से पुनर्वास कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा।

पुनर्वास मॉडल का अगला चरण (CG Naxal Policy)

अब तक सरकार की नीति के तहत बड़ी संख्या में माओवादी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं। पिछले दो वर्षों में सैकड़ों माओवादी मारे गए, हजारों ने सरेंडर किया और कई गिरफ्तार भी हुए। इस अनुभव के आधार पर अब पुनर्वास नीति को और विस्तार देने की योजना बनाई गई है, ताकि जेलों में बंद लोगों को भी सकारात्मक दिशा दी जा सके।

पैरोल और काउंसलिंग पर फोकस

नई रणनीति के तहत ऐसे माओवादियों को पैरोल पर बाहर लाकर पुनर्वास केंद्रों से जोड़ने की योजना (CG Naxal Policy) है। यहां उन्हें काउंसलिंग, प्रशिक्षण और सामाजिक पुनर्स्थापन से जुड़ी गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। खास बात यह है कि पहले से पुनर्वास कर चुके लोग भी इस प्रक्रिया में भूमिका निभाएंगे और जेलों में बंद कैडरों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करेंगे।

जमानत और नई शुरुआत का रास्ता

सरकार की योजना के अनुसार, जो लोग पुनर्वास के लिए तैयार होंगे, उनके मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत राहत देने की भी कोशिश की जाएगी। जमानत मिलने के बाद ऐसे लोग पुनर्वास केंद्रों में रहकर सामान्य जीवन की शुरुआत कर सकेंगे। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य केवल अपराध से दूरी बनाना नहीं, बल्कि स्थायी रूप से समाज से जोड़ना है।

सिर्फ सुरक्षा नहीं, सामाजिक समाधान

सरकार का यह भी मानना है कि नक्सलवाद जैसी समस्या का समाधान केवल सुरक्षा कार्रवाई से संभव नहीं है। इसके लिए सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर भी काम करना (CG Naxal Policy) जरूरी है। इसी कारण पुनर्वास नीति में सांस्कृतिक, खेल और सामुदायिक कार्यक्रमों को भी शामिल किया गया है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक माहौल बनाया जा सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल मुद्दे को लेकर यह रणनीति एक बड़े बदलाव का संकेत देती है, जहां फोकस केवल कार्रवाई से हटकर पुनर्संरचना और पुनर्स्थापन पर भी रखा जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि जेलों से शुरू होने वाली यह पहल कितनी प्रभावी साबित होती है और कितने लोग इसके जरिए मुख्यधारा में लौट पाते हैं।

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