CG IPS Training : चार जिलों के एसपी ट्रेनिंग पर, रायपुर ग्रामीण समेत कई जिलों में बदली कमान

छत्तीसगढ़ में पुलिस विभाग के वरिष्ठ स्तर पर अस्थायी बदलाव किए (CG IPS Training) गए हैं। चार जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को प्रशिक्षण के लिए भेजे जाने के बाद उनकी जगह अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह व्यवस्था प्रशिक्षण अवधि के दौरान जिलों में प्रशासनिक कामकाज सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।

CG IPS Training

जानकारी के अनुसार रायपुर ग्रामीण, कोंडागांव, जांजगीर-चांपा और गरियाबंद जिलों के एसपी ट्रेनिंग के लिए रवाना हुए हैं। यह प्रशिक्षण 6 अप्रैल से शुरू होकर 15 मई तक चलेगा। इस दौरान संबंधित जिलों की जिम्मेदारी अन्य अधिकारियों को दी गई है, ताकि कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग में किसी तरह की बाधा न आए।

किन एसपी को भेजा गया ट्रेनिंग पर (CG IPS Training)

ट्रेनिंग के लिए जिन अधिकारियों को भेजा गया है, उनमें जांजगीर-चांपा के एसपी विजय पाण्डेय, कोंडागांव के एसपी पंकज चंद्रा, गरियाबंद के एसपी वेदव्रत सिरमौर और रायपुर ग्रामीण की एसपी श्वेता सिंहा शामिल हैं। यह प्रशिक्षण प्रशासनिक दक्षता, नेतृत्व क्षमता और आधुनिक पुलिसिंग से जुड़े विषयों पर केंद्रित बताया जा रहा है।

इन अधिकारियों को मिला अतिरिक्त प्रभार

प्रशिक्षण अवधि के दौरान जिलों में जिम्मेदारी संभालने के लिए अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। जांजगीर-चांपा जिले का प्रभार विमल कुमार बैस को सौंपा (CG IPS Training) गया है। कोंडागांव जिले की जिम्मेदारी त्रिलोक बंसल को दी गई है। गरियाबंद जिले का अतिरिक्त प्रभार नीरज चंद्राकर को दिया गया है, जबकि रायपुर ग्रामीण की कमान मनीषा ठाकुर को सौंपी गई है।

प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने की कोशिश

पुलिस मुख्यालय की इस व्यवस्था को प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। आमतौर पर इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान अनुभवी अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी देकर कामकाज को बिना बाधा जारी रखा जाता है।

प्रशिक्षण का उद्देश्य

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों को बदलती चुनौतियों के अनुरूप तैयार (CG IPS Training) करना है। कानून-व्यवस्था, साइबर अपराध, आंतरिक सुरक्षा और जनसंवाद जैसे विषयों पर विशेष फोकस रहने की संभावना है। इससे लौटने के बाद अधिकारी अपने-अपने जिलों में और प्रभावी तरीके से काम कर सकेंगे।

छत्तीसगढ़ में पुलिस विभाग के भीतर इस तरह की व्यवस्थाएं यह दर्शाती हैं कि प्रशासन लगातार क्षमता निर्माण और सिस्टम को मजबूत करने पर काम कर रहा है। आने वाले समय में इसका असर जिलों की पुलिसिंग और कानून-व्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है।

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