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CG Electricity Regulatory Commission : बिजली दरों पर जनता की राय सुनेगा आयोग, चार दिन चलेगी टैरिफ पर अहम सुनवाई

CG Electricity Regulatory Commission

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छत्तीसगढ़ की छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने टैरिफ याचिकाओं पर जन-सुनवाई की तिथियां (CG Electricity Regulatory Commission) घोषित कर दी हैं। उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोग ने पहले दो दिन ऑनलाइन और उसके बाद दो दिन ऑफलाइन जन-सुनवाई आयोजित करने का निर्णय लिया है। इससे राज्य के अलग-अलग हिस्सों से अधिकतम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सकेगी।

आयोग द्वारा जारी पत्र के अनुसार, राज्य की स्वामित्व वाली बिजली कंपनियां छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत पारेषण कंपनी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड और छत्तीसगढ़ राज्य भार प्रेषण केंद्र ने आयोग के समक्ष वित्तीय वर्ष 2024-25 के टू-अप, वर्ष 2026-27 से 2029-30 तक की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR), टैरिफ निर्धारण और पूंजीगत निवेश योजना के अनुमोदन से जुड़ी याचिकाएं दाखिल की हैं।

इसके अलावा, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड ने 11 जुलाई 2025 को जारी टैरिफ आदेश के पुनरीक्षण के लिए भी अलग से याचिका प्रस्तुत (CG Electricity Regulatory Commission) की है। इन सभी याचिकाओं की सूचना जनवरी माह में समाचार पत्रों के माध्यम से सार्वजनिक की जा चुकी है। विस्तृत दस्तावेज आयोग की आधिकारिक वेबसाइट और संबंधित कंपनियों की वेबसाइट पर उपलब्ध कराए गए हैं।

ऑनलाइन जन-सुनवाई की तारीख और स्थान

आयोग ने ऑनलाइन जन-सुनवाई के लिए वितरण कंपनी के छह क्षेत्रों में व्यवस्था की है –

17 फरवरी 2026: दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव

18 फरवरी 2026: अंबिकापुर, जगदलपुर, रायगढ़

इन तिथियों पर इच्छुक नागरिक अपने-अपने क्षेत्र के मुख्य अभियंता / कार्यपालक निदेशक के कार्यालय में उपस्थित होकर ऑनलाइन माध्यम से आयोग की जन-सुनवाई से जुड़ सकेंगे और अपनी आपत्तियां या सुझाव दर्ज करा सकेंगे।

ऑफलाइन जन-सुनवाई भी होगी

ऑनलाइन प्रक्रिया के बाद आयोग दो दिन ऑफलाइन जन-सुनवाई भी आयोजित करेगा। इसकी तिथियां और स्थान अलग से घोषित (CG Electricity Regulatory Commission) किए जाएंगे, ताकि वे उपभोक्ता भी सीधे आयोग के समक्ष अपनी बात रख सकें जो ऑनलाइन माध्यम से नहीं जुड़ पाते।

विद्युत नियामक आयोग का कहना है कि टैरिफ निर्धारण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जनभागीदारी सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। आने वाली यह जन-सुनवाई तय करेगी कि राज्य में बिजली की दरें, निवेश योजनाएं और राजस्व आवश्यकताएं किस दिशा में जाएंगी और इसका सीधा असर हर उपभोक्ता की जेब पर पड़ेगा।

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