छत्तीसगढ़ में डिजिटल शासन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने पारंपरिक किसान किताब को अब डिजिटल (CG Digital Kisan Kitab Launch) रूप दे दिया है। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने अपने निवास कार्यालय में डिजिटल किसान किताब का औपचारिक शुभारंभ किया। इस पहल से प्रदेश के लगभग 40 लाख किसानों और भूमिधारकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस अवसर पर उमेश कुमार पटेल और श्रीकांत वर्मा द्वारा लिखित “छत्तीसगढ़ भू-अभिलेख नियमावली भाग 1 से 4” पुस्तक का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में संचालक भू-अभिलेख विनीत नंदनवार सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
अब किसान किताब होगी पूरी तरह ऑनलाइन
डिजिटल किसान किताब पारंपरिक मैन्युअल ऋण पुस्तिका का स्थान लेगी। अब किसान अपनी भूमि से संबंधित जानकारी कभी भी, कहीं से भी ऑनलाइन प्राप्त (CG Digital Kisan Kitab Launch) कर सकेंगे। यह सुविधा राज्य सरकार के भुइया पोर्टल पर B-1 एवं P-II रिपोर्ट के साथ उपलब्ध रहेगी। किसान इन दस्तावेजों को आसानी से देख और डाउनलोड भी कर सकेंगे।
डिजिटल प्रणाली में भूमि से जुड़े आवश्यक विवरण स्वतः अपडेट होते रहेंगे। इससे रिकॉर्ड संशोधन के लिए राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। संबंधित पटवारी द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराए जाने से दस्तावेजों की वैधता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
बैंक ऋण और योजनाओं में मिलेगी सहूलियत
मंत्री वर्मा ने कहा कि डिजिटल ऋण पुस्तिका केवल तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी और नागरिक-केन्द्रित बनाने की दिशा में ठोस कदम है। उन्होंने कहा कि कृषि प्रधान राज्य होने के कारण बड़ी संख्या में किसान भूमि पर निर्भर हैं। अब डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से बैंक ऋण, फसल ऋण और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में किसानों को आसानी होगी।
त्रुटियां घटेंगी, प्रक्रिया होगी सरल
राज्य सरकार का मानना है कि डिजिटल प्रणाली से रिकॉर्ड में त्रुटियों की संभावना कम होगी और अभिलेखों की शुद्धता बढ़ेगी। प्रशासनिक प्रक्रिया तेज और प्रभावी (CG Digital Kisan Kitab Launch) बनेगी। यह पहल “डिजिटल छत्तीसगढ़” की अवधारणा को मजबूत करेगी और शासन तथा नागरिकों के बीच विश्वास को और सुदृढ़ बनाएगी।
मंत्री ने राजस्व विभाग, NIC और तकनीकी टीम को बधाई देते हुए किसानों से अपील की कि वे इस डिजिटल सुविधा का अधिकतम उपयोग करें। डिजिटल किसान किताब और डिजिटल ऋण पुस्तिका की शुरुआत को राजस्व सुधारों की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
