छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासन से जुड़ा एक अहम घटनाक्रम आज सामने आया है। राज्य के विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक (CG Cabinet Meeting) शुरू हो चुकी है। यह बैठक राजधानी रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित की जा रही है, जहां राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाले प्रस्तावों पर चर्चा के बाद निर्णय लिए जाएंगे।
सूत्रों के अनुसार, आज की कैबिनेट बैठक में विकास, उद्योग, निवेश, रोजगार और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े अहम एजेंडे शामिल हैं। बैठक समाप्त होने के बाद सरकार द्वारा लिए गए फैसलों की आधिकारिक जानकारी अरुण साव मीडिया के सामने साझा करेंगे। सरकार के स्तर पर यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आने वाले समय में राज्य की आर्थिक और औद्योगिक दिशा तय करने वाले कई प्रस्ताव आज मंजूरी की दहलीज पर हैं।
इससे पहले 4 फरवरी को हुई कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार ने एक बड़ा नीतिगत निर्णय लेते हुए छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025–30 को मंजूरी (CG Cabinet Meeting) दी थी। इस नीति का उद्देश्य राज्य में स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बनाना और युवाओं को स्वरोजगार व उद्यमिता की ओर प्रोत्साहित करना है। सरकार का मानना है कि “अमृतकाल छत्तीसगढ़ विज़न @2047” के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए नवाचार आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना अनिवार्य है।
नई स्टार्टअप नीति के तहत केवल राज्य शासन से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप इकाइयों को ही वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन दिए जाएंगे। शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को मजबूती देने के लिए प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट वाले स्टार्टअप्स को मिनिमम वायबल प्रोडक्ट विकसित करने हेतु 10 लाख रुपये तक का सीड फंड प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही राज्य में निवेश को बढ़ाने के उद्देश्य से 100 करोड़ रुपये का छत्तीसगढ़ स्टार्टअप कैपिटल फंड बनाया जाएगा, जिसके जरिए SEBI-पंजीकृत ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स के माध्यम से स्टार्टअप्स में निवेश किया जाएगा।
स्टार्टअप्स को बैंकिंग सहायता से जोड़ने के लिए 50 करोड़ रुपये का क्रेडिट रिस्क फंड भी गठित किया जाएगा। इसके तहत स्टार्टअप इकाइयों को बैंकों से एक करोड़ रुपये तक के बिना गारंटी ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी की सुविधा मिलेगी। वहीं, मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को अधिकतम 50 लाख रुपये तक के सावधि ऋण या कार्यशील पूंजी पर पांच वर्षों तक 75 प्रतिशत ब्याज अनुदान देने का प्रावधान भी नीति में शामिल किया गया है।
स्टार्टअप्स के विस्तार और बाजार तक पहुंच को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजनों में भाग लेने पर यात्रा, पंजीकरण और बूथ शुल्क सहित कुल खर्च का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इसके अलावा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापन खर्च की प्रतिपूर्ति और सफल फंडरेजिंग पर अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान भी किया गया है।
नीति में स्टार्टअप्स को सरकारी खरीद में छूट, भूमि व भवन से जुड़े दस्तावेजों पर स्टाम्प शुल्क में रियायत, तथा इन्क्यूबेशन सेंटर या किराये के भवन में संचालित इकाइयों को तीन वर्षों तक किराया अनुदान देने की व्यवस्था भी की गई है। साथ ही गुणवत्ता प्रमाणीकरण, पेटेंट, परियोजना प्रतिवेदन और सरकारी अनुसंधान संस्थानों से तकनीक क्रय पर भी अनुदान का लाभ मिलेगा।
रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए नीति में विशेष प्रोत्साहन जोड़े गए हैं। दस से अधिक स्थायी रोजगार सृजित करने वाले स्टार्टअप्स को महिला कर्मचारियों के लिए 6,000 रुपये प्रति माह और पुरुष कर्मचारियों के लिए 5,000 रुपये प्रति माह तक की सहायता दी जाएगी। वहीं दिव्यांगजनों, सेवानिवृत्त अग्निवीरों और नक्सल प्रभावित अथवा पीड़ित व्यक्तियों को रोजगार देने वाले स्टार्टअप्स को उनके वेतन का 40 प्रतिशत तक अनुदान पांच वर्षों तक प्रदान किया जाएगा।
राज्य सरकार का विश्वास है कि इन फैसलों और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ में निवेश का माहौल मजबूत होगा, नए स्टार्टअप्स को गति मिलेगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। आज की कैबिनेट बैठक से भी इसी दिशा में कुछ और महत्वपूर्ण फैसलों की उम्मीद की जा रही है, जिन पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं।

