CBI करेगी BSP के लोहा चोरी की जांच, देर रात पहुंची पांच सदस्यीय टीम… अब तक 21 गिरफ्तार

रायपुर. भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के बहुचर्चित 250 टन लौह स्क्रैप चोरी मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) करेगी. अब तक प्रकरण की जांच पुरानी भिलाई थाना पुलिस कर रही थी. राजपत्र में सीबीआई जांच का आदेश जारी होने के बाद सोमवार देर रात केंद्रीय एजेंसी की पांच सदस्यीय टीम जांच के लिए दुर्ग पहुंच गई. मामले में अब तक 21 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है.

3.22 करोड़ की सामग्री जब्त

मामला पहली बार 26 मई को सामने आया था. पुलिस जांच में पता चला था कि स्क्रैप को फ्लाई ऐश या अन्य सामग्री की आड़ में संयंत्र से बाहर निकालकर पहले गोदाम तक पहुंचाया जाता था. इसके बाद इसे आगे खपाने का नेटवर्क सक्रिय था. पुलिस ने अकलोरडीह खदानपारा स्थित एके ट्रेडर्स के गोदाम और हथखोज क्षेत्र में छापेमारी की थी. कार्रवाई के दौरान करीब 250 टन लौह स्क्रैप के साथ वाहन, जेसीबी और हाइड्रा मशीनें जब्त की गई थीं. जब्त सामग्री और वाहनों की कुल कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपए आंकी गई है.

बीएसपी के तीन अधिकारी भी गिरफ्तार

मामले में बीएसपी के तीन अधिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इनमें जीएम हिमांशु भूषण मलिक, नॉन-एग्जीक्यूटिव धनंजय वर्मा और इंजीनियरिंग एसोसिएट मनोज देवांगन शामिल हैं. गिरफ्तारी के बाद तीनों को निलंबित किया जा चुका है.

इसके अलावा ट्रांसपोर्टर संजय सिंह और उसके पुत्र अभय सिंह, भाजपा नेता भास्कर मुदलियार, कारोबारी हिमांशु खंडेलवाल तथा रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड, रसमड़ा के प्रबंध निदेशक विनोद कुमार गर्ग और निदेशक संदीप कुमार सिंह समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है.

अभय सिंह, हिमांशु खंडेलवाल, हिमांशु भूषण मलिक और उपेंद्र उर्फ पिंटू ओझा तथा बीएसपी के इंजीनियरिंग एसोसिएट मनोज देवांगन को जमानत मिल चुकी है.

विधायक लगातार कर रहे थे सीबीआई जांच की मांग

लोहा चोरी मामले में वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन लंबे समय से सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे. उन्होंने 20 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर मामले की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की थी. राज्य विधानसभा में भी उन्होंने यह मुद्दा उठाया था.

अब राजपत्र में सीबीआई जांच संबंधी आदेश जारी होने के बाद मामले की जांच की दिशा बदल गई है. केंद्रीय एजेंसी पुलिस की अब तक की जांच, दस्तावेजों, तकनीकी साक्ष्यों और गिरफ्तार आरोपियों से संबंधित रिकॉर्ड की भी पड़ताल करेगी.

कितने समय से चल रहा था नेटवर्क, होगी जांच

सीबीआई जांच में यह भी पड़ताल की जा सकती है कि बीएसपी से स्क्रैप चोरी का नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसमें किन-किन स्तरों पर लोगों की भूमिका रही. संयंत्र से स्क्रैप बाहर निकालने से लेकर उसे गोदाम तक पहुंचाने और आगे खपाने की पूरी प्रक्रिया की भी जांच होने की संभावना है. इससे मामले में अब तक सामने आए तथ्यों के साथ-साथ चोरी के पूरे नेटवर्क की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है.

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