भारत के महत्वाकांक्षी चीता पुनर्वास अभियान को शनिवार सुबह नई ताकत मिली, जब अफ्रीकी देश बोत्सवाना से नौ चीते विशेष विमान (Botswana Cheetahs Arrival) के जरिए भारत पहुंचे। लगभग सात हजार किलोमीटर की लंबी यात्रा के बाद विमान पहले ग्वालियर एयरपोर्ट उतरा, जहां से भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों के माध्यम से इन्हें मध्यप्रदेश स्थित कूनो नेशनल पार्क लाया गया।
इन नौ चीतों में छह मादा और तीन नर शामिल हैं। नए आगमन के साथ देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 48 हो गई है। फिलहाल 45 चीते कूनो में और तीन मंदसौर जिले के गांधी सागर अभयारण्य में मौजूद हैं।
क्वारंटाइन के बाद जंगल की ओर
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कूनो पहुंचकर नए चीतों को क्वारंटाइन बाड़े में छोड़ा। नियमानुसार, इन्हें लगभग 30 दिनों तक निगरानी में रखा जाएगा। स्वास्थ्य परीक्षण और अनुकूलन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चरणबद्ध तरीके से इन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अलग-अलग देशों से आए चीतों का मिश्रण कूनो के पारिस्थितिकी तंत्र में आनुवंशिक विविधता को मजबूत (Botswana Cheetahs Arrival) करेगा, जिससे दीर्घकालीन संरक्षण की संभावनाएं बढ़ेंगी।
साढ़े तीन साल में तीसरी खेप
भारत में चीता पुनर्वास परियोजना की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो में छोड़ा था। इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते लाए गए। समय के साथ प्रजनन के जरिए संख्या में वृद्धि हुई और अब बोत्सवाना से आई तीसरी खेप ने इस अभियान को नई गति दी है।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक कूनो में 40 शावकों का जन्म हो चुका है, जिनमें से 28 जीवित हैं। यह आंकड़ा परियोजना की प्रजनन क्षमता और अनुकूलन प्रक्रिया की सफलता को दर्शाता है।
भारत में चीतों की मौजूदा स्थिति
कुल चीते: 48
कूनो नेशनल पार्क में: 45
गांधी सागर अभयारण्य में: 3
नामीबिया से आए (शावकों सहित): 20
दक्षिण अफ्रीका से आए (शावकों सहित): 19
बोत्सवाना से आए नए चीते: 9
भारत में जन्मे जीवित शावक: 28
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे भारत और बोत्सवाना के बीच जैव विविधता संरक्षण की ऐतिहासिक साझेदारी बताया। उनका कहना है कि यह पहल न केवल देश के जंगलों को समृद्ध (Botswana Cheetahs Arrival) करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर वन्यजीव संरक्षण का मजबूत संदेश भी देगी।
भारत में करीब सात दशक बाद लौटे चीतों की यह बढ़ती संख्या संकेत दे रही है कि संरक्षण के संगठित प्रयास अब जमीन पर परिणाम दिखा रहे हैं। आने वाले महीनों में इन चीतों का जंगल में अनुकूलन और प्रजनन दर परियोजना की असली परीक्षा होगी।

