BLO Suicide Case Bengal : बीएलओ की आत्महत्या से हड़कंप, सीईओ ने मांगी रिपोर्ट; एसआईआर कार्यभार पर बढ़ा विवाद

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य के दबाव को लेकर एक और बीएलओ की मौत (BLO Suicide Case Bengal) सामने आई है। बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) रिंकू तरफदार शनिवार सुबह अपने घर में फंदे पर लटकी मिलीं। पुलिस के अनुसार, परिवार ने आरोप लगाया है कि रिंकू पिछले कई दिनों से एसआईआर के भारी कार्यभार के कारण तनाव में थीं। उनका शव कृष्णानगर के बंगालझी इलाके में उनके घर से बरामद हुआ, और कमरे से एक सुसाइड नोट भी मिला है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

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पश्चिम बंगाल के मंत्री उज्जवल विश्वास मृतका के घर पहुंचे और परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी। इस घटना पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ा रिएक्शन देते हुए कहा कि एसआईआर के चलते अब और कितनी जानें जाएंगी। उधर, राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार अग्रवाल ने नदिया के डीएम से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

यह पहला मामला नहीं है। जलपाईगुड़ी जिले में इसी सप्ताह एक और बीएलओ की मौत (BLO Suicide Case Bengal) हुई थी, जहां वह फंदे पर लटकी मिली थीं। परिवार ने वहां भी यही आरोप लगाया था कि एसआईआर की ड्यूटी के अत्यधिक दबाव ने जान ले ली। टीएमसी ने दावा किया है कि अब तक एसआईआर के तनाव में तीन बीएलओ मौत का शिकार हो चुके हैं। पार्टी ने सीईओ को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने बिना तैयारी के, जल्दबाज़ी में एसआईआर लागू कर बीएलओ की जान जोखिम में डाल दी है। ग्राउंड स्टाफ कम है, ऐप में तकनीकी गड़बड़ियां लगातार बढ़ रही हैं, और काम का बोझ अत्यधिक है, जिससे बीएलओ मानसिक और शारीरिक रूप से टूट रहे हैं।

इधर, बीएलओ ऐप में भी बदलाव से असंतोष बढ़ा है। पहले वोटर का डेटा अपलोड करने के बाद बीएलओ गलती सुधार सकते थे, लेकिन अब एडिट विकल्प पूरी तरह हटा दिया गया है। शुरुआत में दिया गया “अनमैप” विकल्प भी भारी विवाद का कारण बना था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। बीएलओ संगठनों का कहना है कि तकनीक के नाम पर उन पर और अतिरिक्त दबाव डाला जा रहा है।

मध्य प्रदेश में भी एक मौत

इस बीच, मध्य प्रदेश के दमोह जिले में भी एसआईआर कार्य के दौरान एक बीएलओ की मौत (BLO Suicide Case Bengal) हुई है। दमोह के बीएलओ सीताराम गोंड गुरुवार को रजरा गांव में मतदाताओं से गणना पत्रक भरवा रहे थे, तभी अचानक उनकी तबियत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि लगातार निर्वाचन कार्य के दबाव के कारण उन्हें हार्ट अटैक आया। जिला शिक्षा अधिकारी एस.के. नेमा ने घटना की पुष्टि की और बताया कि सीताराम एसआईआर ड्यूटी के दौरान ही बेहोश हुए थे।

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लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, एसआईआर के समय प्रबंधन, तकनीकी खामियों और बीएलओ की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षक, शिक्षा विभाग के कर्मचारी और बीएलओ संगठन आयोग से मांग कर रहे हैं कि अत्यधिक दबाव, अप्राकृतिक समय सीमाएं और स्टाफ की कमी जैसे मुद्दों पर तुरंत हस्तक्षेप किया जाए, अन्यथा हालात और बिगड़ सकते हैं।

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