न्यायधानी के कोनी क्षेत्र स्थित रिवर व्यू कॉलोनी में मंगलवार की सुबह एक ऐसी खबर आई जिसने गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) के छात्र समुदाय को झकझोर (Bilaspur Law Student Suicide) कर रख दिया। रायगढ़ की रहने वाली 20 वर्षीय लॉ छात्रा दृष्टि गुप्ता ने अपने कमरे में पंखे से लटककर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।
यह महज एक आत्महत्या नहीं, बल्कि एक युवा मन के भीतर चल रहे उस द्वंद्व का अंत है, जहाँ एक तरफ वकील बनने के ऊंचे सपने थे और दूसरी तरफ परिवार की उम्मीदों और शादी का बोझ।
पढ़ाई की डांट और अनचाही शादी की फिक्र (Bilaspur Law Student Suicide)
दृष्टि बीए-एलएलबी सेकंड ईयर की होनहार छात्रा थी। पिछले दो साल से वह बिलासपुर में रहकर अपने भविष्य की नींव रख रही थी। लेकिन पुलिस और सहेलियों से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से वह काफी तनाव में थी। बताया जा रहा है कि घर वाले उसकी शादी की बात चला रहे थे, जबकि दृष्टि अभी सिर्फ अपनी किताबों और कानून की बारीकियों में डूबे रहना चाहती थी। मंगलवार सुबह भी उसकी अपने पिता से फोन पर लंबी बात हुई थी, जिसमें पढ़ाई में लापरवाही को लेकर उसे तीखी डांट पड़ी थी। शायद यही वो पल था जब उसका धैर्य जवाब दे गया।
खामोश कमरा और सहेलियों की आशंका
घटना की रात दृष्टि अपने दोस्तों के साथ थी, शायद वह अपना मन हल्का करना चाहती थी। सुबह जब वह कमरे पर लौटी, तो वह सामान्य नहीं लग रही थी। पिता से फोन पर हुई बहस के बाद उसने खुद को कमरे में कैद (Bilaspur Law Student Suicide) कर लिया। घंटों तक जब कमरे के भीतर से कोई आहट नहीं आई, तो पड़ोस में रहने वाली अन्य छात्राओं का माथा ठनका। उन्होंने आवाज दी, दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर सिर्फ सन्नाटा पसरा था। किसी अनहोनी की आशंका में मकान मालिक को बुलाया गया और फिर कोनी थाना पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस की तफ्तीश और अनसुलझे सवाल (Bilaspur Law Student Suicide)
मौके पर पहुंची पुलिस ने जब दरवाजा तोड़ा, तो दृष्टि का शव फंदे पर झूलता मिला। पुलिस को मौके से फिलहाल कोई औपचारिक सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, लेकिन कमरे की स्थिति और मोबाइल चैट्स कई तरफ इशारा कर रहे हैं। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर परिजनों को सूचित कर दिया है। कोनी पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह मानसिक तनाव और पारिवारिक दबाव का मामला लग रहा है, लेकिन असल वजह कॉल डिटेल्स और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी।
सपनों का गला घोंटता ‘दबाव’
यूनिवर्सिटी के छात्रों के बीच इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश और दुख है। दृष्टि के सहपाठियों का कहना है कि वह एक महत्वाकांक्षी लड़की थी, जो कानून की दुनिया में नाम कमाना चाहती (Bilaspur Law Student Suicide) थी। लेकिन करियर और शादी के बीच सामंजस्य न बिठा पाने का दबाव उस पर भारी पड़ गया। यह घटना एक बार फिर समाज के सामने सवाल खड़ा करती है कि क्या बच्चों की सफलता का पैमाना सिर्फ उनकी डिग्री और शादी है?
