Bilaspur High Court  : नक्सली समर्थक की जमानत याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने NIA स्पेशल कोर्ट के फैसले को ठहराया सही

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नक्सली संगठन से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए नक्सली समर्थक की जमानत याचिका (Bilaspur High Court) खारिज कर दी है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एनआईए स्पेशल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसी को समय दिया जाना उचित है।

मामला कांकेर जिले के आमाबेड़ा थाना क्षेत्र का है, जहां रमेश मंडावी पुत्र राजमन मंडावी के खिलाफ प्रतिबंधित नक्सली संगठन से संलिप्तता और गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। उस पर देश की आंतरिक सुरक्षा और संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया गया है। इस संबंध में उसके खिलाफ पुलिस थाना आमाबेड़ा में एफआईआर दर्ज की गई थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई थी। प्रारंभिक जांच के लिए 90 दिनों की समयसीमा तय की गई थी, जो 14 अक्टूबर 2025 को समाप्त हो गई। इस अवधि के समाप्त होने से पहले 7 अक्टूबर 2025 को शासकीय अधिवक्ता ने एनआईए स्पेशल कोर्ट के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर जांच पूरी करने के लिए 90 दिनों का अतिरिक्त समय मांगा था।

सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि इस मामले में कुछ सह-आरोपियों की गिरफ्तारी अभी लंबित है और राज्य शासन की ओर से आवश्यक अनुमति (Bilaspur High Court) नहीं मिल पाई है। साथ ही मामले की गंभीरता और राज्य की संप्रभुता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय आवश्यक है।

इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए एनआईए स्पेशल कोर्ट ने जांच एजेंसी के आवेदन को स्वीकार करते हुए जांच के लिए 90 दिन की अतिरिक्त मोहलत दे दी थी। इसी दौरान आरोपी ने एनआईए स्पेशल कोर्ट में जमानत के लिए आवेदन पेश किया था, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था।

स्पेशल कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जमानत देने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई।

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने एनआईए स्पेशल कोर्ट के आदेश को सही ठहराते (Bilaspur High Court) हुए कहा कि मामले की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसी को समय देना उचित है। इसके साथ ही अदालत ने नक्सली समर्थक रमेश मंडावी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

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