Bilaspur High Court : बेटे की मौत के बाद मदद के लिए भटकती रही मां, अब उच्च न्यायालय ने सरकार को दिए सख्त निर्देश

बिलासपुर में एक मां की पीड़ा अब अदालत तक पहुंच (Bilaspur High Court) गई है। बेटे की पानी में डूबने से मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन समय बीतने के बाद भी आर्थिक सहायता नहीं मिलने से मामला और गंभीर हो गया। इलाके में इस घटना को लेकर लोगों के बीच चर्चा बनी रही कि आखिर मदद के लिए आवेदन देने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

परिजनों का कहना है कि हादसे के बाद कई बार दफ्तरों के चक्कर लगाए गए, लेकिन राहत राशि को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। लंबे इंतजार और अधिकारियों की चुप्पी के बाद परेशान मां ने आखिरकार उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अब अदालत के आदेश के बाद मामले में फिर हलचल बढ़ गई है।

डूबने से हुई थी युवक की मौत : Bilaspur High Court

बिलासपुर के दीपूपारा निवासी प्रभा तिर्की ने अदालत में याचिका दायर कर बताया कि उनके बेटे की पानी में डूबने से मौत हो गई थी। घटना के बाद उन्होंने राजस्व पुस्तक परिपत्र के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता के लिए आवेदन किया था।

याचिका में बताया गया कि 28 अक्टूबर 2025 को तहसीलदार कार्यालय में आवेदन जमा किया गया था। इसके साथ पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

राज्य सरकार ने रिकॉर्ड नहीं होने की कही बात

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से पक्ष रखा गया कि संबंधित कार्यालय में ऐसा कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि मुआवजे के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था।

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि यदि याचिकाकर्ता दोबारा आवेदन पेश (Bilaspur High Court) करती हैं तो सक्षम अधिकारी नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।

उच्च न्यायालय ने दिए निर्देश

मामले की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद की एकल पीठ में हुई। अदालत ने माना कि डूबने से मौत के मामलों में राजस्व पुस्तक परिपत्र के तहत सहायता राशि देने का प्रावधान मौजूद है। अदालत ने याचिकाकर्ता को आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 15 दिनों के भीतर नया आवेदन संबंधित अधिकारी के सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

45 दिनों में फैसला लेने का आदेश

उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश (Bilaspur High Court) दिया है कि आवेदन मिलने के बाद 45 दिनों के भीतर नियमानुसार निर्णय लिया जाए। अदालत के इस आदेश के बाद अब परिवार को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

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