हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री Bhupinder Singh Hooda को एजेएल प्लाट आवंटन से जुड़े मामले में बड़ी कानूनी (Bhupinder Singh Hooda ED Case) राहत मिली है। प्रवर्तन निदेशालय की विशेष अदालत ने इस मामले में उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया है। लंबे समय से चल रहे इस मामले में आए फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।
अदालत के फैसले के साथ ही इस प्रकरण में उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई पर विराम लग गया है। इससे पहले भी संबंधित मामले में केंद्रीय एजेंसी की जांच में उन्हें राहत मिल चुकी थी।
ED अदालत का फैसला और क्या कहा गया (Bhupinder Singh Hooda ED Case)
पंचकूला स्थित विशेष अदालत ने सुनवाई के दौरान यह माना कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को आगे बढ़ाने का पर्याप्त आधार (Bhupinder Singh Hooda ED Case) नहीं बनता। इसी के चलते अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री को डिस्चार्ज करते हुए मामले से मुक्त कर दिया। इस फैसले के साथ ही एजेएल प्लाट आवंटन प्रकरण में उनकी भूमिका को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया समाप्त हो गई है।
CBI मामले में भी पहले मिल चुकी थी राहत
यह पहला मौका नहीं है जब इस प्रकरण में उन्हें राहत मिली हो। इससे पहले केंद्रीय जांच एजेंसी से जुड़े मामले में भी अदालत ने उन्हें आरोपमुक्त करार दिया था। अब ED मामले में भी राहत मिलने के बाद यह पूरा विवाद लगभग समाप्त माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों मामलों में एक के बाद एक राहत मिलना उनके पक्ष को मजबूत करता है।
लंबे समय से चल रहा था मामला
यह मामला कई वर्षों से विभिन्न जांच एजेंसियों और अदालतों में लंबित था। प्लाट आवंटन को लेकर उठे सवालों के चलते जांच शुरू हुई थी, जिसमें कई कानूनी प्रक्रियाएं शामिल रहीं। अंततः अदालत के इस फैसले के बाद इस पूरे मामले का पटाक्षेप हो गया है, जिससे संबंधित पक्ष को बड़ी राहत मिली है।
राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज
फैसले के बाद राजनीतिक स्तर पर भी प्रतिक्रिया देखने को मिल (Bhupinder Singh Hooda ED Case) सकती है। लंबे समय से चल रहे इस प्रकरण में आए इस निर्णय को अहम माना जा रहा है। इससे भविष्य की राजनीतिक गतिविधियों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल अदालत के आदेश के बाद यह साफ हो गया है कि एजेएल प्लाट आवंटन मामले में अब आगे कोई कानूनी कार्रवाई शेष नहीं बची है।
