मीडिया प्रतिनिधिमंडल के साथ संवाद में मुख्य अभियंता चरणप्रीत सिंह ने रखी भविष्य की रणनीति; पर्यावरणीय प्रवाह, सोलर-हाइड्रो संयोजन और डैम आधुनिकीकरण पर विशेष जोर
नंगल/भाखड़ा। देश की जल, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड अब अपने पारंपरिक कार्यक्षेत्र से आगे बढ़ते (Bhakra Nangal Dam Modernization) हुए हरित ऊर्जा, आधुनिकीकरण, पर्यावरणीय संतुलन और पर्यटन विकास की दिशा में उल्लेखनीय कदम उठा रहा है।
भाखड़ा-नंगल बांध एवं पावर प्लांट के अध्ययन दौरे पर आए मीडिया प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत संवाद में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के मुख्य अभियंता चरणप्रीत सिंह ने इन पहलों, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति की जानकारी साझा की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने डैम परिसर स्थित नेहरू संग्रहालय का भी भ्रमण कर परियोजना के ऐतिहासिक और तकनीकी विकास को समझा।
पर्यावरणीय प्रवाह और हरित ऊर्जा की दिशा में पहल (Bhakra Nangal Dam Modernization)
मुख्य अभियंता ने बताया कि अब पर्यावरणीय प्रवाह को केवल जल प्रवाह तक सीमित न रखते हुए, ऊर्जा उत्पादन के साथ जोड़ा जा रहा है। इस दिशा में 1.7 मेगावाट क्षमता का मिनी/माइक्रो हाइडल प्रोजेक्ट विकसित किया जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय प्रवाह को बनाए रखते हुए बिजली उत्पादन भी सुनिश्चित होगा।
इसके साथ ही 4 मेगावाट क्षमता का रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किया जा चुका है तथा ग्राउंड-माउंटेड सोलर परियोजनाओं पर भी कार्य प्रगति पर है। यह पहल स्वच्छ और सतत ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
डैमों का आधुनिकीकरण: बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना योजना के तहत कार्य
पुराने हो चुके बांधों की संरचनात्मक सुरक्षा और दक्षता को ध्यान में रखते (Bhakra Nangal Dam Modernization) हुए भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड, विश्व बैंक समर्थित बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना यानी बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना (डीआरआईपी) के अंतर्गत व्यापक आधुनिकीकरण कार्य कर रहा है।
इसके तहत आधुनिक इंस्ट्रूमेंटेशन और मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे बांधों की सुरक्षा, निगरानी और संचालन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इन प्रयासों से भाखड़ा जैसे ऐतिहासिक बांध की आयु और कार्यक्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है।
सिल्ट हटाने की पहल: जलाशय क्षमता बढ़ाने पर जोर
भाखड़ा जलाशय में बढ़ती गाद (सिल्ट) एक प्रमुख चुनौती के रूप में सामने आई है। इसे देखते हुए भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड ने डिसिल्टिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे जलाशय की उपयोगी क्षमता को बनाए रखा जा सके।
साथ ही, इस गाद का उपयोग राजमार्ग एवं रेलवे निर्माण में करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है। इससे जहां जलाशय की क्षमता बढ़ेगी, वहीं निर्माण कार्यों के लिए वैकल्पिक संसाधन भी उपलब्ध होंगे।
पर्यटन और विरासत संरक्षण को बढ़ावा
परियोजना क्षेत्र को पर्यटन के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से नंगल बांध पर एक आधुनिक संग्रहालय का निर्माण किया (Bhakra Nangal Dam Modernization) जा रहा है। इस संग्रहालय में ऑडियो-विजुअल तकनीक के माध्यम से परियोजना का इतिहास और विकास यात्रा प्रस्तुत की जाएगी।
पुरानी मशीनरी को संरक्षित कर प्रदर्शनी में शामिल किया जाएगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों को तकनीकी विरासत से अवगत कराया जा सके। प्रतिवर्ष लगभग 4 से 5 लाख पर्यटक इस क्षेत्र का दौरा करते हैं और इसे और अधिक आकर्षक बनाने के प्रयास जारी हैं।
तकनीकी उत्कृष्टता और गुणवत्ता मानक
मुख्य अभियंता ने बताया कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की परियोजनाओं का नियमित निरीक्षण देश के प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा किया जाता है, जिनमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की प्रमुख है।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा किए गए विश्लेषण में भाखड़ा डैम की गुणवत्ता को उच्च स्तर का बताया गया है। संचालन में मानक प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाता है, जिससे परियोजना की विश्वसनीयता बनी रहती है।
मुख्य चुनौतियाँ
बोर्ड के समक्ष कई चुनौतियाँ मौजूद हैं, जिनमें प्रमुख रूप से स्टाफ की कमी, तकनीकी अनुभव का सीमित हस्तांतरण, तथा जलाशयों में बढ़ती सिल्ट शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर विवाद भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है, जो कई बार न्यायालय में विचाराधीन रहता है। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड एक बहु-राज्यीय संस्था होने के कारण निर्णय प्रक्रिया में समय लगना स्वाभाविक है।
भविष्य की रणनीति और राष्ट्रीय दृष्टिकोण
मुख्य अभियंता ने कहा कि देश में उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि जल अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार जाने के बजाय देश के भीतर ही उपयोग हो सके।
सिंधु जल संधि के संदर्भ में भी जल प्रबंधन की नई रणनीतियों पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही नहरों की क्षमता बढ़ाकर जल वितरण प्रणाली को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। नए बांधों के निर्माण में आ रही चुनौतियों को देखते हुए मौजूदा परियोजनाओं की क्षमता वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड देश की जल और ऊर्जा संरचना का एक मजबूत स्तंभ है। हरित ऊर्जा, आधुनिक तकनीक, जल संरक्षण और पर्यटन विकास के क्षेत्र में उठाए जा रहे कदम यह दर्शाते हैं कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रतिबद्ध है।
