बेमेतरा जिले ने कृषि क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए दलहन एवं तिलहन (Bemetara Agriculture Model) फसलों के क्षेत्र विस्तार में प्रदेश स्तर पर एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत किया है।
जिला प्रशासन की सुविचारित एवं समयबद्ध रणनीति, कृषि विभाग के सतत मार्गदर्शन तथा किसानों की सक्रिय सहभागिता से जिले में फसल विविधीकरण को मजबूत आधार मिला है, जो आज एक प्रेरणादायी सफलता कहानी के रूप में सामने आया है।
जिला प्रशासन द्वारा रबी और खरीफ—दोनों कृषि मौसमों में दलहन–तिलहन फसलों को प्राथमिकता देने की स्पष्ट नीति अपनाई गई। इसी क्रम में कृषि विभाग ने किसानों को उन्नत एवं प्रमाणित बीजों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की, आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया तथा खेत भ्रमण, ग्राम स्तरीय जागरूकता शिविर और विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई।
इन निरंतर और योजनाबद्ध प्रयासों से किसानों में दलहन एवं तिलहन फसलों के प्रति भरोसा बढ़ा और उन्होंने पारंपरिक फसलों के साथ-साथ वैकल्पिक एवं अधिक लाभकारी फसलों को अपनाने में रुचि दिखाई।
इन सामूहिक प्रयासों का प्रत्यक्ष और सकारात्मक परिणाम यह रहा कि जिले में दलहन फसलों का रकबा 70,800 हेक्टेयर से बढ़कर 83,330 हेक्टेयर तक पहुंच गया। वहीं तिलहन फसलों का क्षेत्र, जो पहले मात्र 820 हेक्टेयर था, बढ़कर 2,582 हेक्टेयर तक पहुंच गया। यह वृद्धि लगभग तीन गुना से अधिक है, जो जिले की कृषि क्षमता, प्रभावी योजना और किसानों की बदलती सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
दलहन एवं तिलहन फसलों के क्षेत्र विस्तार से न केवल किसानों की आय में वृद्धि की संभावनाएं मजबूत हुई हैं, बल्कि जिले में फसल विविधता को भी नया प्रोत्साहन मिला है।
इसके साथ ही मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जल संरक्षण, पोषण सुरक्षा और संतुलित कृषि प्रणाली को भी मजबूती मिली है। दलहन फसलें जहां मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं, वहीं तिलहन फसलें किसानों को बेहतर बाजार मूल्य और अतिरिक्त आय के अवसर प्रदान कर रही हैं।
आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में बेमेतरा जिले की यह उपलब्धि एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम मानी जा रही है। यह सफलता जिला प्रशासन, कृषि विभाग और मेहनती किसानों के बीच बेहतर समन्वय, प्रतिबद्धता और दूरदर्शी सोच का परिणाम है। बेमेतरा जिले की यह पहल आने वाले समय में प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी और टिकाऊ, समृद्ध तथा संतुलित कृषि विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।

