छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में बैगलेस डे (Bagless Day) को यादगार बनाने के लिए एक अनूठी पहल की गई। जिले के करीब 500 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में एक साथ पोषण वाटिका तैयार की गई, न्योता भोजन का आयोजन हुआ, अतिरिक्त पूरक पोषण आहार वितरित किया गया और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण किया गया। इस पहल के जरिए बच्चों को किताबों के साथ व्यवहारिक शिक्षा, पोषण और पर्यावरण संरक्षण का महत्व भी सिखाया गया।
पोषण वाटिका से मिलेगा ताजा और पौष्टिक भोजन (Bagless Day)
कलेक्टर रेना जमील के मार्गदर्शन में विद्यालय परिसरों में सेमी, लौकी, बरबट्टी, खीरा, तरोई समेत कई मौसमी सब्जियों का रोपण किया गया। इन पोषण वाटिकाओं में तैयार होने वाली ताजी सब्जियों का उपयोग प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत मध्यान्ह भोजन में किया जाएगा। इससे बच्चों को पौष्टिक भोजन मिलने के साथ जैविक खेती और पोषण की व्यवहारिक जानकारी भी मिलेगी।
न्योता भोजन से बढ़ी समाज की भागीदारी
बैगलेस डे के अवसर पर कई स्कूलों में ‘न्योता भोजन’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों और अभिभावकों ने बच्चों के लिए फल, मिठाई और पौष्टिक भोजन की व्यवस्था की। इससे विद्यालय और समाज के बीच सहभागिता भी मजबूत हुई।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से दिया पर्यावरण का संदेश (Bagless Day)
विद्यालयों में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण किया। बच्चों ने पौधों की देखभाल का संकल्प भी लिया। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।
व्यवहारिक शिक्षा पर रहा विशेष फोकस
जिला शिक्षा अधिकारी लता बेक ने बताया कि बैगलेस डे केवल किताबों से अलग एक दिन नहीं है, बल्कि बच्चों को जीवनोपयोगी कौशल, श्रम का सम्मान, सामुदायिक सहयोग और प्रकृति से जुड़ने का अवसर देने का माध्यम है। इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
प्रदेश के लिए बना प्रेरणादायी मॉडल
सूरजपुर जिले की यह पहल शिक्षा, पोषण, पर्यावरण संरक्षण और जनसहभागिता का सफल उदाहरण बनकर उभरी है। एक साथ 500 विद्यालयों में आयोजित इस अभियान को प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायी मॉडल माना जा रहा है।
