Amit Jogi Life Imprisonment : जग्गी हत्याकांड में 23 साल बाद अमित जोगी को उम्रकैद, हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला

छत्तीसगढ़ की सियासत को दहला देने वाले हाईप्रोफाइल मामले ‘जग्गी हत्याकांड’ में आज न्याय की एक ऐसी इबारत लिखी गई, जिसने सत्ता और रसूख की दीवारों को हिला (Amit Jogi Life Imprisonment) कर रख दिया है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के अध्यक्ष अमित जोगी को हत्या और साजिश रचने का दोषी पाया है। कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

कानून की नजर में सब बराबर, हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी (Amit Jogi Life Imprisonment)

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डबल बेंच ने सीबीआई की अपील (ACQA No. 66/2026) पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के उस पुराने फैसले को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें अमित जोगी को ‘क्लीन चिट’ मिली थी।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही। अदालत ने साफ किया कि जब एक ही गवाही और एक ही तरह के सबूतों के आधार पर 28 अन्य आरोपियों को सजा दी जा चुकी है, तो उन्हीं तथ्यों के आधार पर मुख्य साजिशकर्ता को बरी करना कानूनी रूप से पूरी तरह गलत और असंगत है। कोर्ट ने अमित जोगी पर IPC की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोष सिद्ध करते हुए उन पर 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

उस दिन ने प्रदेश की राजनीति बदल दी? (Amit Jogi Life Imprisonment)

4 जून 2003 को एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी और पार्टी के कोषाध्यक्ष थे, उनकी सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड ने उस वक्त की जोगी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया था।

मामले की जांच जब आगे बढ़ी, तो इसमें कुल 31 नाम (Amit Jogi Life Imprisonment) सामने आए थे। 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने 28 लोगों को तो सजा सुनाई थी, लेकिन मुख्य आरोपी के तौर पर देखे जा रहे अमित जोगी को ‘सबूतों के अभाव’ में बरी कर दिया था।

सतीश जग्गी की लंबी कानूनी लड़ाई

पिता के न्याय के लिए उनके बेटे सतीश जग्गी ने हार नहीं मानी। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। लंबी कानूनी प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद यह मामला फिर से खुला और हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। आज के फैसले ने यह साबित कर दिया कि न्याय की चक्की भले ही धीरे चलती है, लेकिन पिसती जरूर है।

दोषियों की लंबी फेहरिस्त

इस मामले में पहले ही सजा काट रहे या दोषी पाए गए नामों में याह्या ढेबर, अभय गोयल, फिरोज सिद्दीकी, वीके पांडे और चिमन सिंह जैसे कई रसूखदार नाम शामिल (Amit Jogi Life Imprisonment) हैं। अब इस सूची में मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर अमित जोगी का नाम भी जुड़ गया है।

हालांकि, खबर है कि इस फैसले के तुरंत बाद अमित जोगी के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की है, लेकिन फिलहाल हाईकोर्ट के इस फैसले ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है।

Exit mobile version