AI Generated Content: गैरकानूनी सामग्री हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर तीन घंटे
नई दिल्ली/ए.। केंद्र सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार डीपफेक (AI Generated Content) और अन्य कृत्रिम रूप से उत्पन्न सामग्री से होने वाले नुकसान से निपटने के लिए नियामक ढांचे को मजबूत किया है। आईटी नियमों में किए गए हालिया संशोधनों के तहत एआई-जनित सामग्री की स्पष्ट लेबलिंग और पता लगाने योग्य मेटाडेटा सुनिश्चित करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही, सरकार या अदालत के आदेश के आधार पर गैरकानूनी सामग्री हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर तीन घंटे कर दी गई है। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 5 अगस्त 2026 को लोकसभा में दी।
डीपफेक के खतरों पर सरकार की नजर
सरकार ने कहा कि वह एआई से संचालित डीपफेक (AI Generated Content) से पैदा होने वाले खतरों के प्रति सचेत है। इसमें कृत्रिम ऑडियो, वीडियो और लिखित सामग्री शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं के लिए खुला, सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह साइबरस्पेस सुनिश्चित करना है। इसी दिशा में मौजूदा कानूनों और नियमों के जरिए डीपफेक के विभिन्न पहलुओं से निपटने की व्यवस्था की गई है।
आईटी अधिनियम में कई प्रावधान
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत कंप्यूटर और कंप्यूटर सिस्टम को नुकसान पहुंचाने, कंप्यूटर संबंधी अपराध, पहचान की चोरी, प्रतिरूपण और निजता के उल्लंघन जैसे अपराधों के खिलाफ दंड का प्रावधान है। अश्लील या यौन रूप से स्पष्ट सामग्री के प्रकाशन और प्रसारण पर भी कार्रवाई की जा सकती है। अधिनियम की धारा 69ए के तहत विशिष्ट सूचना या लिंक तक पहुंच को अवरुद्ध करने और धारा 79 के तहत गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल की जा रही जानकारी को हटाने की व्यवस्था है।
बीएनएस में भी कार्रवाई का प्रावधान
AI Generated Content: भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 में भी डीपफेक से जुड़े अपराधों पर कार्रवाई के प्रावधान हैं। धारा 319 के तहत प्रतिरूपण के जरिए धोखाधड़ी, जबकि धारा 336 के तहत धोखाधड़ी और किसी व्यक्ति को धोखा देने या उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तैयार करने पर कार्रवाई की जा सकती है। धारा 353 गलत या भ्रामक बयान, अफवाह और रिपोर्ट के जरिए दुष्प्रचार फैलाने पर अंकुश लगाती है। संगठित साइबर अपराधों पर धारा 111 के तहत भी कार्रवाई संभव है।
आईटी नियमों में मध्यस्थों की जिम्मेदारी बढ़ी
आईटी नियम, 2021 के तहत मध्यस्थों को उचित सावधानी बरतना अनिवार्य है। उन्हें उपयोगकर्ताओं को ऐसी सामग्री होस्ट, अपलोड, प्रकाशित या साझा करने से रोकना होता है जो किसी अन्य व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन करती हो, अश्लील या निजता का उल्लंघन करने वाली हो, बच्चों के लिए नुकसानदेह हो, घृणा या हिंसा को बढ़ावा देती हो या गलत सूचना फैलाती हो। एआई के जरिए किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण करने वाली सामग्री और राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करने वाली सामग्री भी इसके दायरे में आती है।
बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अतिरिक्त दायित्व
50 लाख या उससे अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ताओं वाले महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थों (एसएसएमआई) पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां लागू हैं। उन्हें गैरकानूनी सामग्री के प्रसार का पता लगाने और उसे सीमित करने के लिए स्वचालित उपकरणों का इस्तेमाल करना होता है। साथ ही, अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित करने, स्थानीय अधिकारियों की नियुक्ति करने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय के लिए भारत में भौतिक पता उपलब्ध कराने जैसी व्यवस्थाएं भी अनिवार्य हैं।
एआई कंटेंट पर स्पष्ट लेबल और मेटाडेटा
10 फरवरी 2026 को आईटी नियमों में संशोधन के बाद एआई (AI Generated Content) से उत्पन्न सामग्री को लेकर नियामक व्यवस्था और सख्त की गई। मध्यस्थों को एआई-जनित सामग्री पर स्पष्ट लेबलिंग और पता लगाने योग्य मेटाडेटा उपलब्ध कराना होगा, ताकि उपयोगकर्ता ऐसी सामग्री की पहचान कर सकें। इसका उद्देश्य धोखाधड़ी और एआई तकनीक के दुरुपयोग को रोकना है।
गैरकानूनी एआई सामग्री पर तत्काल कार्रवाई
संशोधित नियमों में बाल यौन शोषण सामग्री, बिना सहमति के अंतरंग तस्वीरें, प्रतिरूपण और अन्य हानिकारक एआई-जनित सामग्री को विशेष रूप से शामिल किया गया है। प्लेटफॉर्मों को ऐसी सामग्री की पहचान और रोकथाम के लिए तकनीकी उपाय अपनाने होंगे तथा जानकारी मिलने पर तत्काल कार्रवाई करनी होगी।
सामग्री हटाने की समयसीमा तीन घंटे
सरकार के अनुसार संशोधनों के बाद सरकार या अदालत के आदेश से प्राप्त वैध और तर्कसंगत सूचना के आधार पर गैरकानूनी जानकारी हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर तीन घंटे कर दी गई है। शिकायत निवारण की कुछ संवेदनशील श्रेणियों के मामलों में भी समयसीमा घटाई गई है। नग्नता या पहचान छिपाने जैसे मामलों में संबंधित समयसीमा 72 घंटे से घटाकर 36 घंटे और कुछ अन्य मामलों में 24 घंटे से घटाकर दो घंटे की गई है।
एआई के दुरुपयोग को रोकने के लिए तकनीकी उपाय
मध्यस्थों को उचित और उपयुक्त तकनीकी उपाय अपनाने होंगे। इनमें स्वचालित उपकरण या अन्य उपयुक्त तंत्र शामिल हैं, ताकि उपयोगकर्ता ऐसी कृत्रिम रूप से उत्पन्न जानकारी बनाने, संशोधित करने, प्रकाशित करने, साझा करने या प्रसारित करने से रोके जा सकें जो लागू कानून का उल्लंघन करती हो। महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थों को बलात्कार, बाल यौन शोषण या इससे संबंधित स्पष्ट अथवा अस्पष्ट सामग्री की पहचान के लिए भी तकनीकी तंत्र विकसित करने होंगे।
नियमों का पालन नहीं करने पर सुरक्षा खत्म
सरकार ने स्पष्ट किया है कि आईटी नियमों में निर्धारित कानूनी दायित्वों का पालन नहीं करने पर मध्यस्थों को आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत तृतीय पक्ष की सूचना से मिलने वाली छूट समाप्त हो सकती है। ऐसी स्थिति में वे मौजूदा कानूनों के तहत दंडात्मक कार्रवाई या अभियोजन का सामना कर सकते हैं।
