Editorial: नव प्रदेश छत्तीसगढ़ को विकास गढ़ के रुप में तब्दील करने के लिए संकल्पित मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने अपने कार्यकाल का तीसरा बजट उस समय पेश किया है जब छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना की रजत जयंती मना रहा है। जाहिर है इस बजट में लीक से अलग हटकर कुछ नया होने की उम्मीद थी। इस बजट में कई नई घोषणाएं की गई हैं और सभी को साथ लेकर सबका विकास करने के मूलमंत्र को दृष्टिगत रखते हुए गांव, गरीब, किसान, युव और महिला सहित सभी के हितों का ध्यान रखा गया है। विकसित भारत के सपने को साकार करने में छत्तीसगढ़ का योगदान सुनिश्चित करने के लिए इस बजट को विकासोन्मुखी बनाने का प्रयास किया गया है।
इसमें कोई दो मत नहीं कि वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इस बजट को समावेशी और संतुलित बनाने में अपनी ओर से कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी है। उन्होंने अपना बजट भाषण इन पंक्तियों के साथ शुरू किया था कि – न चंदन से न कुमकुम से श्रृंगार कराकर आया हूं, न रोली से न वंदन से मस्तक सजाकर आया हूं, स्वयं ईश्वर भी जो कामना करे वो सौभाग्य जगाकर आया हूं, अपने छत्तीसगढ़ की माटी से मै तिलक लगाकर आया हूं। इन प्रेरक पंक्तियों को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने अपने बजट में सुनहरे सपने के रुप में परिणित करने की हर संभव कोशिश की है और इसमें वे काफी हद तक सफल भी रहे है।
छत्तीसगढ़ की माटी की सोंधी सुगंध लिए यह बजट प्रदेश के तीन करोड़ बाशिंदों का सौभाग्य जगाने वाला सिद्ध होगा और छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष में उनके सुनहरे सपनों को नई उड़ान देगा ऐसी उम्मीद की जा सकती है। एक लाख बहत्तर हजार करोड़ रुपये के इस नये बजट में आम आदमी पर कोई नया कर नहीं थोपा गया है जो पहले से ही आसमान छूती महंगाई की मार से आहत प्रदेश की जनता के लिए बड़ी राहत की बात है। इस बजट में कृषि प्रधान इस प्रदेश में कृषि की दिशा और किसानों की दशा बदलने के लिए कृषि के लिए 13507 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
पंचायत और ग्रामीण विकास के लिए 16560 करोड़ रुपये आबंटित किए गए हैं। इससे निश्चित रुप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। कृषि के साथ ही प्रदेश के औद्योगिक विकास की परिकल्पना को भी इस बजट में साकार करने कारगर पहल की गई है।औद्योगिक विकास का बजट दोगुना किया गया है। इस बजट में 23 नये औद्योगिक पार्क विकसित करने की घोषणा की गई है जिससे रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे। इस बजट में पहली बार सदियों से उपेक्षित आदिवासी बहुल बस्तर क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
बस्तर में विकास की बयार बहाना आसान काम कभी नहीं रहा है। नक्सली हिंसा के चलते वहां विकास कराना असंभव की हद तक कठिन काम सिद्ध होता रहा है। अब जल्द ही बस्तर से नक्सली आतंक का सफाया होने जा रहा है जिससे बस्तर के दिन बहुरने की संभावना बलवती हुई है।
इसे मद्देनजर रखकर बस्तर के लिए बजट में दो एजुकेशन सिटी एक मेडिकल कालेज, बैंकों की नई शखाएं, बस सेवा का विस्तार तथा दूरस्थ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने मुख्यमंत्री मोबाइल टावर योजना के तहत अतिरिक्त टावरों का निर्माण सहित अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। जिससे बस्तर की तस्वीर और तकदीर बदल सकती है। कुल मिलाकर यह बजट बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के विकास को रफ्तार देने वाला बजट है।
