संपादकीय: वस्तुओं के दाम बांधने प्रभावी पहल जरूरी

मिडिल ईस्ट में छाये युद्ध के बादल की वजह से पेट्रोल डीजल और रसोई गैस की किल्लत भारत में भी महसूस की जा रही है हालांकि अभी हालात काबू में है लेकिन कमर्शियल गैस की कीमतों में सरकार को एक हजार रूपये प्रति सिलेन्डर की वृद्धि करनी पड़ी है। इसका असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पडऩे लगा है। आवश्यक वस्तुओं के दामों में वृद्धि हो रही है। खासतौर पर खाने पीने के समान महंगे हो रहे हैं। अधिकांश होटलों में कमर्शियल गैस का ही उपयोग होता है इसलिए वे खाने पीने की वस्तुओं के दाम मनमाने ढंग से बढ़ाने लगे हैं।
यदि उपभोक्ता उनकी इस मनमानी का विरोध करता है तो वे कमर्शियल गैस के दाम में हुई बढ़ौत्तरी का हवाला देते हैं जिन छोटे होटलों में रसोई गैस का इस्तेमाल नहीं होता और वे तंदूर में कोयले व लकड़ी का उपयोग कर भोजन बनाते हैं उन्होंने भी खाने पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ा दिये हैं। इसलिए शासन प्रशासन को चाहिए कि इनकी मनमानी पर रोक लगाने प्रभावी पहल करे। ताकि कमर्शियल गैस सिलेन्डर महंगे होने की आड़ में आम उपभोक्ताओं के साथ की जा रही लूटमार बंद हो।
गौरतलब है कि बहुत बड़ी संख्या में लोग नाश्ते और भोजन के लिए होटलों पर ही निर्भर होते हैं ऐसे लोगों को खाने पीने की चीजों सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम बढऩे से भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। निकट भविष्य में पेट्रोल और डीजल के दाम में भी वृद्धि हो सकती है और यदि ऐसा हुआ तो महंगाई और ज्यादा बढ़ेगी। और इसकी वजह से आम आदमी का घरेलू बजट गड़बड़ा जाएगा । ऐसा न हो इसके लिए आवश्यक वस्तुओं के दाम बांधना निहायत जरूरी है।



