रायपुर. छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत पर्यटन विकास के लिए 500 करोड़ रुपये की मूल मिशन निधि प्रस्तावित की गई है। वहीं सार्वजनिक-निजी भागीदारी, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, केंद्र सरकार की योजनाओं और विभिन्न विभागों के समन्वय से 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाने की कार्ययोजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में पर्यटन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर और धार्मिक स्थलों की दृष्टि से समृद्ध है। इन विशेषताओं को पर्यटन के माध्यम से व्यापक पहचान दिलाकर स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को मजबूती दी जा सकती है। पर्यटन का लाभ केवल अधोसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्थानीय युवाओं, महिलाओं, हस्तशिल्पियों, कलाकारों और छोटे कारोबारियों तक भी पहुंचना चाहिए।
पांच प्रमुख स्थलों के विकास पर जोर
मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के पहले चरण में चित्रकोट जलप्रपात, मैनपाट, सिरपुर, हसदेव बांगो जलाशय और राजिम को प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके अलावा मायाली-बगीचा, चंपारण, सतरेंगा, तीरथगढ़, देवरानी-जेठानी, कबीर चबूतरा, केंदई, महामाया और चिल्फी घाटी सहित अन्य स्थलों पर भी सुविधाओं का विस्तार प्रस्तावित है।
पर्यटन स्थलों पर बेहतर सड़क संपर्क, स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय, पार्किंग, पर्यटक सहायता केंद्र, डिजिटल सूचना प्रणाली, प्राथमिक चिकित्सा और सुरक्षा संबंधी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विकास कार्यों में स्थानीय संस्कृति, प्राकृतिक परिवेश और जैव विविधता के संरक्षण का ध्यान रखा जाए।
चार प्रमुख और 15 मिनी पर्यटन सर्किट
प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों को जोड़ने के लिए चार प्रमुख और 15 मिनी पर्यटन सर्किट विकसित किए जाएंगे। प्रमुख पर्यटन मार्गों पर 15 से 20 मार्ग सुविधाएं तथा लगभग 500 पर्यटन संकेतक स्थापित करने की योजना है। इससे पर्यटकों को स्थलों तक पहुंचने और यात्रा की योजना बनाने में आसानी होगी। पर्यटन मार्गों में प्राकृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक, पुरातात्विक और जनजातीय महत्व के स्थानों को जोड़ने पर जोर रहेगा।
पर्यटन से जुड़े रोजगार के नए अवसर
मिशन के तहत 1,000 नए पर्यटन उद्यमी तैयार करने और 250 महिला स्व-सहायता समूहों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 600 आतिथ्य एवं पर्यटक सहायता कर्मियों तथा 500 मार्गदर्शकों और अन्य अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की योजना है।
ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में घरों में पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था, स्थानीय व्यंजन, पारंपरिक हस्तशिल्प, लोककला, पर्यटन मार्गदर्शन और परिवहन सेवाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा पर्यटन से होने वाली आय का लाभ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा।
पर्यटकों की संख्या दोगुनी करने की तैयारी
राज्य सरकार ने प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या दोगुनी करने और उनके औसत प्रवास की अवधि बढ़ाकर दो दिन करने का लक्ष्य रखा है। पर्यटकों के लिए होटल, रिसॉर्ट और होमस्टे जैसी आवास सुविधाओं का विस्तार करते हुए 12 हजार अतिरिक्त कमरों की क्षमता विकसित करने की कार्ययोजना बनाई गई है।
इसके साथ ही 10 से 20 सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजनाओं के माध्यम से कम से कम 1,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य है। इससे पर्यटन से जुड़े होटल, खानपान, परिवहन और अन्य व्यवसायों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
डिजिटल सुविधाओं से आसान होगी यात्रा
पर्यटकों की सुविधा के लिए बहुभाषी पर्यटन वेबसाइट, मोबाइल अनुप्रयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सूचना, डिजिटल बुकिंग, ऑनलाइन भुगतान और वास्तविक समय में मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इससे पर्यटन स्थलों, आवास, परिवहन और स्थानीय आकर्षणों की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर और सरगुजा की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति, लोकनृत्य, हस्तशिल्प और पारंपरिक खानपान छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान हैं। इनके संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। मिशन के क्रियान्वयन और निगरानी के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय मार्गदर्शक समिति तथा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय संचालन समिति का प्रावधान किया गया है।
बैठक में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह सहित पर्यटन, वन, उद्योग, वित्त, लोक निर्माण, नगरीय प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
