भीषण गर्मी में हांफने लगे सीएसईबी के पावर प्लांट
सेंट्रल पुल के भरोसे सप्लाई, खपत 7000 मेगावाट पार, उत्पादन घटकर 2000 से 2200 मेगावाट के आसपास
ईश्वर चंद्रा
Two units shut down due to bursting of ash dam in Korba: कोरबा। प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली व्यवस्था पर जबरदस्त दबाव बना हुआ है। मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, लेकिन उत्पादन घटने से हालात असंतुलित हो गए हैं। सबसे बड़ा असर कोरबा स्थित हसदेव ताप विद्युत संयंत्र (एचटीपीपी) में झाबू राखड़ बांध फूटने की घटना के बाद सामने आया है, जहां दो यूनिट पूरी तरह बंद करनी पड़ी हैं।
मौजूदा स्थिति में प्रदेश की बिजली खपत 7000 से 7300 मेगावाट के पार पहुंच चुकी है, जबकि खुद का उत्पादन घटकर करीब 2000-2500 मेगावाट रह गया है। इस बड़े अंतर को पाटने के लिए राज्य को सेंट्रल सेक्टर से भारी मात्रा में बिजली लेनी पड़ रही है। उत्पादन कम होने के कारण प्रदेश को रोजाना करीब 4800 से 5000 मेगावाट बिजली सेंट्रल पुल से लेनी पड़ रही है। इससे बिजली कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अनुबंधित बिजली उपलब्ध होने से सप्लाई फिलहाल नियंत्रित है।
कोरबा हादसे से उत्पादन पर सीधा असर
छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर के संयंत्रों की उत्पादन क्षमता 2960 मेगावाट है, लेकिन उत्पादन 26 से 27 सौ मेगावाट तक ही हो पाता है। इस समय तो उत्पादन 2000 से 2200 सौ मेगावाट तक ही हो रहा है। एचटीपीपी के 840 मेगावाट संयंत्र में झाबू राखड़ बांध फूटने के बाद राख निकासी प्रभावित हो गई है। इसके चलते 210-210 मेगावाट की क्षमता वाली यूनिट-3 और यूनिट-4 को बंद करना पड़ा। वहीं शेष यूनिट्स भी पूरी क्षमता पर नहीं चल पा रही हैं। यूनिट-1 से करीब 110 मेगावाट और यूनिट-2 से लगभग 130 मेगावाट उत्पादन हो रहा है। अन्य इकाइयों को भी सीमित लोड पर संचालित किया जा रहा है, जिससे कुल उत्पादन में भारी गिरावट आई है।
मौसम बदला तो घटी बिजली खपत
विद्युत वितरण कंपनी के एमडी भीम सिंह ने बताया कि मौसम में बदलाव के चलते प्रदेश में बिजली की खपत में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। भीषण गर्मी के दौरान बिजली की मांग 7200 से 7300 मेगावाट तक पहुंच गई थी, जिससे बिजली व्यवस्था पर लगातार दबाव बना हुआ था। उन्होंने कहा कि बढ़ती मांग को देखते हुए सेंट्रल पुल से भी अतिरिक्त बिजली ली जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। एमडी ने बताया कि राहत की बात यह है कि मड़वा का बंद पड़ा एक प्लांट फिर से उत्पादन में आ गया है। इसके शुरू होने से बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ी है और सप्लाई व्यवस्था को काफी हद तक सहारा मिला है।
जांच के लिए पहुंचेगी विशेषज्ञ टीम
राखड़ बांध फूटने की घटना की जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम एचटीपीपी पहुंचेगी। टीम तकनीकी कारणों का विश्लेषण कर भविष्य के लिए सुधारात्मक सुझाव देगी और स्थानीय स्टाफ को प्रशिक्षण भी देगी।
राख निकासी बदली, मरम्मत तेज
स्थिति को संभालने के लिए संयंत्र प्रबंधन ने राख को झाबू की बजाय डिंडोलभाठा राखड़ बांध की ओर डायवर्ट कर दिया है। उधर, क्षतिग्रस्त बांध की मरम्मत युद्धस्तर पर जारी है। तटबंध मजबूत करने, रिसाव रोकने और जल निकासी व्यवस्था सुधारने पर फोकस किया जा रहा है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी किए जा रहे हैं।
मांग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
गर्मी के चलते बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है और यह 7000- 7300 मेगावाट तक पहुंच गई है, जो अब तक का उच्चतम स्तर है। यह पिछले साल की तुलना में करीब 200 मेगावाट ज्यादा है।
वर्जन : झाबू राखड़ बांध पर दबाव कम करने के लिए उत्पादन घटाया गया है। शेष इकाइयों को आंशिक क्षमता पर चलाया जा रहा है और राख को दूसरे बांध में भेजा जा रहा है। मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है और अगले दो दिनों में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। – (एचके सिंह, मुख्य अभियंता, हसदेव ताप विद्युत संयंत्र )
