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पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के लिए जनभागीदारी महत्त्वपूर्ण, अपनी विरासत पर हो गर्व : मोदी

Last Modified Aat : 12-Jul-18

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नयी दिल्ली  (वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के लिए जनभागीदारी को महत्त्वपूर्ण बताते हुये आज कहा कि हमें अपनी विरासत के बारे में जानकारी और उस पर गर्व होना चाहिये। श्री मोदी ने यहाँ भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (एएसआई) की नयी इमारत ‘धरोहर भवन’ के उद्घाटन के मौके पर यह बात कही। उन्होंने कहा कि दुनिया के कुछ देशों में सेवानिवृत्त लोग धरोहरों के संरक्षण में योगदान देते हैं। हमारे देश में अभी यह सोच विकसित नहीं हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा “दुनिया में इस क्षेत्र में जन सहयोग, जन भागीदारी बहुत मिलती है। वहाँ सेवानिवृत्त लोग गाइड का काम करते हैं। वे अपनी धरोहरों के बारे में पर्यटकों को बताते हैं। हमारे देश में यह मानसिकता बनानी है।” उन्होंने कहा कि समाज जिस प्रकार धरोहरों का संरक्षण कर सकता है किसी संस्था के कर्मचारी नहीं कर सकते। उन्होंने इसमें कॉर्पोरेट दुनिया को साझेदार बनाने की सलाह देते हुये कहा कि स्थानीय कंपनियों से बात करनी चाहिये कि क्या उनके कर्मचारी महीने में 10-15 घंटे इस दिशा में दे सकते हैं।

धरोहरों के संरक्षण के बारे में जानकारी को महत्त्वपूर्ण बताते हुये श्री मोदी ने कहा कि बच्चों को उनके पाठ्यक्रम में उनके शहर का इतिहास बताया जाये। स्थानीय स्तर पर टूरिस्ट गाइड का सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू किया जा सकता है जिससे गाइड को उसके शहर की धरोहरों के बारे में एक-एक जानकारी होना सुनिश्चित किया जा सके। जब जानकारी होती है तो अपनेपन की ताक़त बढ़ जाती है। हमें हमारे धरोहर की जानकारी होना बहुत ज़रूरी है।

अपनी विरासत पर गर्व के लिए प्रेरित करते हुये प्रधानमंत्री ने कहा “हम कुछ चीजों के इतने आदि हो जाते हैं कि उसका महत्त्व नहीं समझते। इस विलगाव ने हमारा काफी नुकसान किया है। आजादी के बाद भी एक ऐसी सोच ने हमें जकड़ कर रखा है जो पुरातन के गर्व को बुरा मानता है। जब तक हमें इस पुरानी धरोहर पर गर्व नही होगा, तब तक उसे संजोने का मन ही नहीं करता।”