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संपादकीय : लोकसभा अध्यक्ष की सांसदों से अपील

Last Modified Aat : 12-Jul-18

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संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण सत्र में संसद का कामकाज बाधित ना हो और पूर्व सत्रों की तरह ही मानसून सत्र भी हंगामों की भेंट ना चढ़े इसलिए लोकसभा अध्यक्ष सुमीत्रा महाजन ने सदन के सभी सदस्यों को पत्र लिखकर उनसे अपील की है। कि वें 16वीं लोकसभा के आखिरी वर्ष में अधिक से अधिक विधाई कार्य संपन्न कराने में योगदान दे। राजनीतिक एवं चुनावी लड़ाई को सदन के बाहर अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में लड़े। सुमीत्रा महाजन ने कहा है कि 16वीं लोकसभा के कार्यकाल के अंतिम वर्ष में मात्र 3 सत्र बचे है। समय बहुत कम है और काम बहुत ज्यादा है इसलिए लोकसभा में ज्यादा से ज्यादा विधायी कार्यों पर चर्चा सुनिश्चित की जानी चाहिए। संसद सदस्यों को यह बात स्मरण रखनी चाहिए कि भारत के लोकतांत्रिक मुल्यों सिंद्धातों और आदर्शों का पूरे विश्व में उदाहरण दिया जाता है। लोकसभा के सदस्यों को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि जनता ने उन्हें इस महान सभा का सदस्य बनने का जो आर्शिवाद दिया है और उनके प्रति जो विश्वास व्यक्त किया है उसकी हमें रक्षा करनी चाहिए। ताकि लोकतंत्र के इस सबसे बड़े मंदिर की प्रतिष्ठा और सुचिता बनी रहे। निश्चित रूप लोकसभा अध्यक्ष ने अपनी इस अपिल से लोकसभा सदस्यों को आईना दिखाया है जो संसद को राजनीति के अखाड़े के रूप में तब्दील करते रहे है। संसद की एक दिन की कार्यवाही पर करोड़ों रूपए खर्च होता है। किन्तु हमारे माननीय सांसद सत्र के दौरान सिर्फ हंगामा खड़ा कर जनता के गाड़े खुन पसीने की कमाई को पानी में बहा देते है। पिछले कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि संसद में विधायी कार्य हो ही नहीं पा रहे है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव के चलते कामकाज कई दिनों तक ठप्प कर दिया जाता है। बहरहाल जो सो हुआ लेकिन अब 16 वीं लोकसभा के इस अंतिम तीन सत्रों में विधायी कार्यों को संपादित करना सत्तापक्ष और विपक्ष की जिम्मेदारी बनती है। संसद का सुचारू संचालन हो यह सभी का दायित्व है। उम्मीद की जानी चाहिए कि लोकसभा अध्यक्ष की इस अपील को सांसद गंभीरता से लेेंगे और मानसून सत्र को हंगामों की भेंट नहीं चढऩे।