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संपादकीय : जेलों में अव्यवस्था का आलम

Last Modified Aat : 11-Jul-18

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उत्तरप्रदेश के बागपत जेल में कुख्यात माफिया डान मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर की गई हत्या ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। लगभग 40 हत्याओं का आरोपी मुन्ना बजरंगी समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजपार्टी के नेताओं का करीबी था जिसकी एक अन्य गैंगस्टर सुनील राठी ने जेल के भीतर दिनदहाड़े हत्या कर दी। इस घटना के बाद बागपत जेल के जेलर सहित चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है और मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए है। गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले ही मुन्ना बजरंगी की पत्नी ने जेल के भीतर अपने पति की हत्या कराए जाने की आशंका व्यक्त की थी। इसे संभवत: प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया। बहरहाल इस घटना से यह साबित हो गया है कि जेलों के भीतर पैसे और पहुंच वाले अपराधियों को हर चीज सुलभ होती है। इसके पूर्व  कई जेलों में जब छापा पड़ा था तो वहां बड़ी मात्रा में नशे के सामान और मोबाइल सहित कई आपत्तिजनक चीजें बरामद हुई थी। आज स्थिति यह है कि जेलों में बंद माफिया सरगना जेल के भीतर से ही अपनी गैंग चलाते है और वे मोबाइल के माध्यम से अपने गुर्गों के संपर्क में बने रहते है। जाहिर है जेल अधिकारियों की मिलीभगत से ही जेल में बंद अपराधी अपनी आपराधिक गतिविधियों को संचालित करते है। जेल के भीतर भी उनका इनका खौफ होता है कि अन्य कैदी उनके खिलाफ शिकायत करने का साहस नहीं कर पाते। जेलों में अवैध हथियार पहुंचना भी आम बात है। जेलों में व्याप्त अव्यवस्था के चलते ही गैंगस्टर सुनील राठी को जेल में पिस्तौल मिल गई जिससे उसने मुन्ना बजरंगी को दस गोलियां मारी थी। अब वह हथियार भी जेल में बरामद हो गया है। इस घटना के बाद सरकार को चाहिए कि वह जेलों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम करे और जेल अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय करे। ऐसे जेल अफसरों के खिलाफ निलंबन की नहीं बल्कि बर्खास्तगी की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए जो चंद रुपयों की खातिर जेल के भीतर अपराधियों को हर तरह की सुविधा सुलभ कराते है।